मराठवाड़ा विश्वविद्यालय में शामिल हुआ मंडी के साहित्यकार पवन चौहान का यात्रा संस्मरण

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मराठवाड़ा विश्वविद्यालय में शामिल हुआ मंडी के साहित्यकार पवन चौहान का यात्रा संस्मरण


मंडी, 03 मई (हि.स.)। मंडी जिला के सुंदरनगर- महादेव निवासी साहित्यकार पवन चौहान का यात्रा संस्मरण डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र में अध्ययनरत छात्र पढ़ेंगे। पवन की साहित्यिक उपलब्धियों में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। उनके यात्रा संस्मरण को बी.ए. द्वितीय वर्ष के तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनका यह संस्मरण किन्नर कैलाश की यात्रा से संबंधित है। बेहद कठिन, रोमांचक और धार्मिक यात्रा के उनके अनुभव को मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के अंतर्गत 475 कॉलेज के विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम में वर्ष 2025 के सत्र से पढ़ रहे हैं।

हिंदी विषय की इस पुस्तक का नाम साहित्य विविधा है।

यह पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के निर्देशानुसार तैयार की गई है। इसमें विनोद कुमार शुक्ल, गोपालदास सक्सेना 'नीरज', लतीफ घोंघी, हरिशंकर परसाई, रामवृक्ष बेनीपुरी, गजानन माधव मुक्तिबोध, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, बालकृष्ण भट्ट, उदय प्रकाश, उपेन्द्रनाथ अश्क जैसे बेहतर रचनाकारों के साथ पवन चौहान की रचना भी शामिल की गई है। इससे पूर्व यह संस्मरण केरल और नागपुर विश्वविद्यालय के बी.कॉम. प्रथम सेमेस्टर और बी.ए. प्रथम सेमेस्टर में पढ़ाया जा रहा है। उनकी यह उपलब्धि पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है।

इससे पूर्व इनकी कई रचनाएं विभिन्न स्कूली तथा विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल हुई हैं।

हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के सरकारी पाठ्यक्रम में कविता और कहानी तथा सी.बी.एस.ई. व आइ.सी.एस.ई. संबद्ध भारत के विभिन्न स्कूली पाठ्यक्रमों की पुस्तकों में विद्यार्थी उनकी कहानी, कविता, यात्रा संस्मरण, संवाद, आलेख आदि पढ़ रहे हैं।

पवन चौहान कहानी, कविता, बाल कहानी, फीचर व पर्यटन लेखन में बराबर सक्रीय हैं। इनकी लिखी दो पुस्तकें हिमाचल का बाल साहित्य और जड़ों से जुड़ाव इन विषयों की हिमाचल की प्रथम पुस्तकें हैं। इनका यह कार्य उल्लेखनीय है। यही नहीं, इनकी कई रचनाओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ नेपाली में भी अनुवाद के साथ, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से ‘पवन चौहान की बाल कहानियों का आलोचनात्मक विश्लेषण’ विषय पर लघु शोध भी हुआ है। इनकी विभिन्न साहित्यिक विधाओं की अब तक 11 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पवन चौहान एक शिक्षक हैं और वर्तमान में विद्यालय छम्यार में प्रवक्ता हिंदी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

इसके साथ ही, पवन अपने विद्यार्थियों को साहित्य के साथ जोड़ने का शानदार कार्य कर रहे हैं। इनके विद्यार्थियों की रचनाएं देशभर की सभी पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं। इन्होंने हिमाचल में दीवार पत्रिका का एक नया नवाचार दिया है, जो बच्चों की सृजनशीलता और पठन-पाठन को बेहतर बना रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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