सैन्य अधिकारियों ने युद्ध के बदलते स्वरूप एवं आर्टिलरी के भविष्य पर किया मंथन

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सैन्य अधिकारियों ने युद्ध के बदलते स्वरूप एवं आर्टिलरी के भविष्य पर किया मंथन


- जनरल एस.एफ. रोड्रिग्स मेमोरियल सेमिनार का आयोजन

चंडीगढ़, 21 सितंबर (हि.स.)। भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट (तोपखाना रेजिमेंट) ने सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज के सहयोग से चंडीगढ़ के मानेकशॉ हॉल में 'जनरल एस.एफ. रोड्रिग्स मेमोरियल सेमिनार' के चौथे संस्करण का आयोजन किया। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एस.एफ. रोड्रिग्स की याद में आयोजित इस वार्षिक सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, दिग्गज (पूर्व सैनिक), रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ एक साथ आए। उन्होंने युद्ध के बदलते स्वरूप और आर्टिलरी के भविष्य पर गहन चर्चा की।

सेमिनार में बताया गया कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल सुनीत फ्रांसिस रोड्रिग्स, पीवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) के सैन्य आधुनिकीकरण में योगदान और दूरदर्शी दृष्टिकोण भारतीय सेना के लिए आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने 1990 से 1993 तक 15वें सेना प्रमुख के रूप में और बाद में 2004 से 2010 तक पंजाब के राज्यपाल के रूप में कार्य किया था। इस वर्ष के सेमिनार का विषय आर्टिलरी द्वारा नेटवर्क आधारित सटीक फायरिंग के माध्यम से असममित क्षमता था।

इस विषय के तहत वैश्विक संघर्षों से मिली सीख और असममित सैन्य क्षमताओं के वैश्विक रुझानों पर चर्चा की गई। इसमें मल्टी डोमेन ऑपरेशंस में स्वचालन (ऑटोमेशन) और निर्णय लेने की श्रेष्ठता के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। युद्धक्षेत्र में तेज, सटीक और निर्णायक प्रभाव डालने में सक्षम सटीक मारक क्षमता, लंबी दूरी की फायरिंग और निर्बाध नेटवर्क इस सेमिनार के प्रमुख आकर्षण रहे।

उद्घाटन भाषण देते हुए, महानिदेशक आर्टिलरी, लेफ्टिनेंट जनरल अनूप सिंघल ने इस बात पर जोर दिया कि तोपखाने की भविष्य की प्रभावशीलता केवल हथियारों की रेंज या कैलिबर पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सेंसर, शूटर और निर्णय लेने वालों को एक नेटवर्क से जोडऩे की क्षमता पर निर्भर करेगी। मानवरहित हवाई प्रणालियों,युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणालियों, उपग्रह और हवाई खुफिया जानकारी, सटीक लक्ष्य-प्राप्ति प्रणालियों और मजबूत कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ तोपों, रॉकेटों और मिसाइलों का एकीकरण दुश्मन के खिलाफ असाधारण युद्ध प्रभाव उत्पन्न करने में सक्षम बनाएगा।

चर्चाओं में मारक क्षमता में असममिति की अवधारणा का परीक्षण किया गया, जहां तकनीकी एकीकरण, सटीकता, पहुंच, जवाबदेही और सूचना श्रेष्ठता अपेक्षाकृत छोटी सेनाओं को भी दुश्मन पर भारी नुकसान थोपने में सक्षम बना सकती है।

अपने समापन भाषण में, पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम ने कहा कि आर्टिलरी रेजिमेंट उन्नत मारक क्षमता, सटीकता, एआई, स्वचालन, निरंतर निगरानी और नेटवर्किंग द्वारा संचालित एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। उन्होंने युद्धक्षेत्र की पूरी गहराई में सटीक और निर्णायक मारक क्षमता प्रदान करने में भारतीय तोपखाने को सक्षम बनाए रखने के लिए सिद्धांतों, तकनीकों, संगठनों और प्रशिक्षण पद्धतियों को लगातार विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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