यमुनानगर के सरकारी स्कूलों में एक साल में कम हुए दस हजार छात्र,ड्रापआउट सर्वे शुरू
यमुनानगर, 06 जनवरी (हि.स.)। यमुनानगर जिले के राजकीय स्कूलों से बच्चों का लगातार बाहर होना शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी बन गया है। बीते एक साल में ही सरकारी स्कूलों से 10,683 विद्यार्थियों की संख्या कम हो गई, जबकि दो वर्षों में यह आंकड़ा 20,635 तक पहुंच चुका है। यह गिरावट महज संख्या नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा तंत्र की जमीनी कमजोरियों की तस्वीर पेश कर रही है। शिक्षा विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 19 जनवरी तक चार-चरणीय सर्वे शुरू किया है। विभाग का दावा है कि ड्रॉप आउट बच्चों को चिन्हित कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इस लक्ष्य पर सवाल खड़े कर रही है।
सर्वे के पहले चरण में शिक्षक, शिक्षा स्वयंसेवक, स्काउट-गाइड, एनएसएस, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि उन इलाकों में भेजे गए हैं, जहां ड्रॉप आउट की आशंका अधिक है। इनमें अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्र, प्रवासी परिवार, सड़क पर रहने वाले बच्चे, अनाथ, घुमंतु समुदाय और ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले परिवार शामिल हैं। 7 से 14 और 16 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है। जिले के एक दर्जन से अधिक सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है, जबकि दो दर्जन स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। करीब 600 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। शीतकालीन अवकाश के दौरान शिक्षकों को सर्वे में लगाया गया है, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सीमित स्टाफ के दम पर इतना बड़ा लक्ष्य हासिल हो पाएगा।
आंकड़े बताते हैं कि समस्या अचानक नहीं आई। वर्ष 2022 में जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 1,07,386 थी, जो 2025 में घटकर 86,517 रह गई। यानी हर साल हजारों बच्चे या तो पढ़ाई छोड़ रहे हैं या सरकारी स्कूलों से भरोसा उठाकर निजी संस्थानों की ओर जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रॉप आउट के पीछे केवल गरीबी या पारिवारिक कारण ही नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी ढांचे की खराब हालत, डुअल डेस्क, भवन और अन्य शैक्षणिक संसाधनों का अभाव भी बड़ी वजह है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता के अनुसार, सर्वे में चिन्हित बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने की योजना है। छह से सात वर्ष के बच्चों का नजदीकी सरकारी प्राथमिक स्कूल में दाखिला कराया जाएगा, जबकि बड़े बच्चों के पढ़ाई छोड़ने के कारणों की समीक्षा की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

