मुख्यमंत्री की बैठकों में होने वाले फैसले लागू करने को समय सीमा तय

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-सरकार ने सभी विभागों को जारी की एसओपी

चंडीगढ़, 09 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा के सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए फैसलों को धरातल पर लागू करवाते समय उन्हें टालने वाली नीति नहीं चलेगी। अब किसी भी फाइल पर अधिकारी ‘आवश्यक कार्यवाही करें’, ‘शीघ्र कार्यवाही करें’ तथा ‘देख लें’ आदि जैसे शब्द नहीं लिखकर नोटिंग नहीं देंगे। अब फाइलों पर स्पष्ट लिखा जाएगा कि क्या कार्य करना है। कौन करेगा। किसके सहयोग से और कब तक करेगा। इस कार्य का क्या परिणाम अपेक्षित है। इन पांच बिंदुओं के आधार पर ही सरकार की फाइलें चलेंगी।

मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए फैसलों को अब तय समय सीमा में लागू किया जाएगा। इस मामले में कोताही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। राज्य सरकार ने बैठकों के संबंध में विस्तृत एसओपी सभी विभागों को जारी कर दी है।

मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, संबंधित विभागों द्वारा कम से कम तीन दिन पहले बैठक में शामिल होने वाले अधिकारियों को एजेंडा उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि अधिकारी अपनी रिपोर्ट तैयार कर सकें। बैठक में उन्हीं विषयों को रखा जाएगा जिन पर फैसले लिए जा सकें।

बैठक की कार्यवाही अथवा ‘मिनट्स ऑफ मीटिंग’ तैयार करने के लिए भी गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि बैठक के फैसले उन सभी अधिकारियों को भेजने अनिवार्य होंगे जिनसे संबंधित योजना है। अभी तक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसले फील्ड में तैनात अधिकारियों तक पहुंचने में लंबा समय लग रहा है। कई केसों में तो फैसले मुख्यालय तक ही सिमट जाते हैं। जिसके चलते सरकार ने यह कार्रवाई की है। अब निदेशक से लेकर धरातल पर काम करवाने वाले अधिकारी तक को फैसले की जानकारी तीन दिन के भीतर दी जाएगी। कार्यवाही में यह भी स्पष्ट करना अनिवार्य होगा कि किन मुद्दों पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। बैठक होने के तीन दिन के भीतर ‘मिनट्स ऑफ मीटिंग’ तैयार करने जरूरी होंगे।

सरकार ने इससे आगे भी सख्ती दिखाई है। अक्सर अधिकारी बैठकों में ‘कार्यवाही की जा रही है’ बोलकर छूट जाते हैं लेकिन अब एक्शन टेकन रिपोर्ट में ठोस कार्रवाई का जिक्र करना जरूरी होगा। यही नहीं किसी योजना के पूरे होने तथा कार्य चलने के संबंध में ठोस सबूत रिपोर्ट के साथ लगाना होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एमओएम जारी होने के एक माह के भीतर एटीआर दी जाएगी। अधिकारियों को यह जारी जानकारी सीएम मीटिंग मॉनिटरिंग पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इस रिपोर्ट को सीएमओ के अधिकारी देखेंगे और मुख्यमंत्री को सीधे रिपोर्ट करेंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू करवाने तथा उन्हें मॉनिटर करने के लिए सभी विभाग एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे। सीएम की बैठकों के संबंध में उक्त अधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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