पीजीटी कंप्यूटर साइंस के परिणाम पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

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चंडीगढ़, 05 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा पीजीटी कंप्यूटर साइंस का सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट परिणाम घोषित किए जाने के बाद समूचे विपक्ष ने एकजुटता के साथ सरकार व आयोग को घेरा है। इस परिणाम में पांच हजार अभ्यर्थियों में से केवल 39 पास हुए हैं।

परिणाम जारी होने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एचपीएससी को ‘हेरा फेरी सर्विस कमीशन’ की संज्ञा देते हुए कहा कि सरकार ने हरियाणा के युवाओं के लिए नौकरी की सिलेक्शन पॉलिसी नहीं, बल्कि रिजेक्शन पॉलिसी लागू कर रखी है।

पीजीटी कंप्यूटर साइंस भर्ती का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने कहा कि भर्ती की अधिसूचना 2019 में जारी हुई, बाद में 2023 में री-एडवर्टाइजमेंट किया गया। अब 2026 में आए रिजल्ट में अधिकांश को फेल घोषित कर दिया गया। सुरजेवाला ने कहा कि 8 साल तक युवाओं का समय, पैसा, सेहत और भविष्य दांव पर लगाकर रखा गया और अंत में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। यह धोखा नहीं तो और क्या है। सरकार हरियाणा के युवाओं को सिर्फ चपरासी, क्लर्क या क्लास-4 की नौकरियों के लायक समझती है। ऊपरी पदों पर या तो फेल कर दिया जाता है या बाहर के लोगों को मौका मिल जाता है।

इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि पीजीटी कंप्यूटर साइंस परीक्षा में मात्र 2.29 प्रतिशत अभ्यर्थियों को पास किया जाना योग्य युवाओं के साथ भद्दा मजाक है। हरियाणा के युवा सरकारी नौकरियों के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं लेकिन एचपीएससी उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है और उन्हें नालायक और नाकाबिल साबित करने पर तुली है। हरियाणा के युवा अपनी मेहनत से यूपीएससी जैसी बेहद कठिन परिक्षाओं को पास करके आईएएस, आईपीएस, जज और वैज्ञानिक बन रहे हैं। ऐसे में यह बात गले से नहीं उतरती कि पीजीटी कंप्यूटर साइंस जैसी एक सामान्य परीक्षा में पास हुए मात्र 2.29 प्रतिशत ही योग्य हैं। दूसरी ओर अभी तक जितनी भी भर्तियां की गई हैं उनमें से 90 प्रतिशत बाहर के प्रदेशों के लोगों को भर्ती किया गया है। यह सब सोची समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि एचपीएससी सिलेक्शन की बजाय हरियाणवी युवाओं के लिए रिजेक्शन कमीशन बन चुका है। उन्होंने कहा कि वर्षों इंतजार के बाद 1711 पदों की भर्ती का परिणाम आया तो सिर्फ 39 ही पास हुए, बाकी 1672 पद खाली रह जायेंगे। इससे पहले भी अनेक भर्तियों में पदों को खाली रखा गया। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की बजाए गैर-हरियाणवी पब्लिक सर्विस कमीशन बन गया है। क्योंकि ज्यादातर चयन बाहर के युवाओं का हो रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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