टीडीआर प्रमाणपत्रों की अब नहीं घटेगी कीमत, कलेक्टर रेट होगा लागू
-मंत्रिमंडल ने पांच साल पुरानी टीडीआर पालिसी में संशोधन को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 03 नवंबर (हि.स.)। हरियाणा में जमीन की तेजी से बदलती कीमतों के बीच अब हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) प्रमाणपत्रों की कीमत नहीं घटेगी। संशोधित नीति के तहत, उस काल्पनिक भूमि (नोशनल लैंड) की गणना के फार्मूले को संशोधित किया जाएगा, जिसके लिए टीडीआर प्रमाणपत्र जारी किया गया है। यह गणना आवेदन के कैलेंडर वर्ष की एक जनवरी को लागू दर की बजाय आवेदन जमा करने की तिथि को दी गई भूमि पर लागू भारित औसत कलेक्टर रेट पर आधारित होगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में हस्तांतरणीय विकास अधिकार प्रदान करने और उसके उपयोग से संबंधित 16 नवंबर 2021 की नीति में संशोधनों को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य टीडीआर प्रमाणपत्रों के मूल्यांकन, हस्तांतरण और उपयोग से जुड़े मुद्दों का समाधान करना तथा बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन को सुगम बनाना है।
मौजूदा टीडीआर पालिसी के तहत उन भू-स्वामियों को टीडीआर प्रमाणपत्र दिए जाने का प्रविधान है, जो बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक अपनी भूमि सरकार को देते हैं। भू-स्वामी ऐसे प्रमाणपत्रों को उसी विकास योजना के भीतर डेवलपर्स या अन्य उपयोगकर्ताओं को बेचकर अपने विकास अधिकारों का मुद्रीकरण (मोनीटाइज) करके धनराशि प्राप्त कर सकते हैं।
मंत्रिमंडल ने प्राप्ति स्थल (रिसीविंग साइट) की नोशनल भूमि की गणना के फार्मूले में भी बदलाव को मंजूरी दी है। संशोधित गणना में आवेदन जमा करने की तिथि पर प्राप्ति स्थल पर लागू भारित औसत कलेक्टर दर को ध्यान में रखा जाएगा, जिसके आधार पर टीडीआर प्रमाणपत्र प्रदान किया गया था। इसके अलावा टीडीआर प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए संबंधित उपायुक्त द्वारा अधिसूचित कलेक्टर दर और आवेदन जमा करने की तिथि पर लागू कलेक्टर दर को मान्य माना जाएगा, चाहे उसे अंततः किसी भी तिथि को उपयोग में लाया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

