गुरुग्राम नगर निगम के कार्यकारी अभियंता के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की सिफारिश
-रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन में लापरवाही पर की गई कार्रवाई
-मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं मिलीं
-आवश्यक दस्तावेजों के अभाव का मामला आया सामने
गुरुग्राम, 03 नवंबर (हि.स.)। नगर निगम गुरुग्राम में रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन, रखरखाव एवं हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में सामने आई गंभीर अनियमितताओं को लेकर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत मेजर पेनल्टी कार्यवाही शुरू करने के लिए चार्जशीट जारी करने की सिफारिश की है।
इस संबंध में 30 अक्टूबर 2026 को शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा के आयुक्त व सचिव को पत्र भेजा गया है।
मामला नगर निगम की मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन एवं रखरखाव से संबंधित छह माह के दो अनुबंधों के दौरान मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं से जुड़ा है। निगम द्वारा 20 मशीनों के लिए 26 सितंबर 2026 को कार्यादेश जारी किया गया था, जबकि पांच मशीनों के लिए 12 अगस्त 2026 को कार्यादेश जारी किया गया था। संबंधित अवधि में कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण इस कार्य के प्रभारी थे। निगमायुक्त द्वारा मामले की जांच अतिरिक्त निगमायुक्त यश जलुका को सौंपी गई थी। उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को जांच की तथा 28 अक्टूबर 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच में संबंधित कार्यकारी अभियंता और एजेंसी के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। जांच रिपोर्ट में मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में पर्याप्त तकनीकी सत्यापन नहीं किए जाने, मशीनों एवं उनके कलपुर्जों की वास्तविक स्थिति का उचित लिखित रिकॉर्ड और प्रमाणन उपलब्ध नहीं होने तथा निगम की संपत्तियों की सुरक्षा एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त निगरानी नहीं किए जाने जैसी कमियां सामने आईं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व एजेंसी जे.के. कॉन्ट्रैक्टर से मशीनों की मरम्मत लागत की वसूली तथा अनुबंध के तहत निर्धारित पेनल्टी लगाने के संबंध में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला।
जांच के दौरान नई एजेंसी राधा कृष्ण सोसाइटी लिमिटेड की जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की गई। आरएफपी की शर्त संख्या 3.6 के अनुसार एजेंसी को बोली लगाने से पहले मशीनों का निरीक्षण करना तथा उन्हें जैसी हैं, जहां हैं के आधार पर स्वीकार करना था। वहीं शर्त संख्या 5(डी) के तहत बड़ी मरम्मत सात दिनों के भीतर पूरी की जानी थी। जांच रिपोर्ट में एजेंसी की ओर से निरीक्षण, सत्यापन और मशीनों में पाई गई कमियों को समय पर दूर करने के संबंध में भी कमियां दर्ज की गईं।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

