कैथल :मनरेगा का नया कानून गरीबों के रोजगार पर डाका : सुरजेवाला
कैथल, 11 जनवरी (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की भाजपा सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाया गया “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार तथा आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून” गरीबों के रोजगार-अधिकार की दिनदहाड़े हत्या है। उन्होंने इसे करोड़ों मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला बताया।
कैथल में रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि मनरेगा मजदूरों को काम मांगने का जो कानूनी अधिकार मिला था, उसे छीनकर अब सारा नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथों में दे दिया गया है। यह नया कानून एससी, एसटी, ओबीसी और गरीब वर्ग को सामाजिक न्याय से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर कुल 8 बड़े हमले किए हैं। केंद्र सरकार मजदूरी की पूरी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है और अब केवल 60 प्रतिशत बजट देने की बात कर रही है, जबकि राज्यों को 40 प्रतिशत देना होगा। पहले से आर्थिक संकट झेल रहे राज्य इतने संसाधन नहीं जुटा पाएंगे, जिससे रोजगार मिलना मुश्किल हो जाएगा।
सुरजेवाला ने कहा कि मनरेगा एक डिमांड ड्रिवन योजना थी, जिसमें मजदूर के काम मांगते ही रोजगार देना अनिवार्य था, लेकिन नए कानून में यह अधिकार खत्म कर दिया गया है। अब केंद्र तय करेगा कि कहां, कितना और कितने दिन काम मिलेगा। इसके साथ ही 100 दिनों के रोजगार की गारंटी भी समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी श्रम को पूजा मानते थे और मजदूर को देवता। इसलिए सबसे पहले गांधी के नाम को हटाया गया। भाजपा ने गांधी और भगवान राम के नाम का राजनीतिक उपयोग किया, लेकिन उनके विचारों और आदर्शों को खत्म कर दिया। प्रेस वार्ता में उनके साथ सुदीप सुरजेवाला, जिला अध्यक्ष रामचंद्र गुर्जर ढांड, पार्षद रामनिवास मित्तल, पूर्व पार्षद सुरेंद्र रांझा, बिल्लू सैनी, रामकुमार बंसल सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

