कैथल के गांव सजूमा में 56 बच्चे बीमार, हाे रही गंदे पानी की सप्लाई

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कैथल के गांव सजूमा में 56 बच्चे बीमार, हाे रही गंदे पानी की सप्लाई


कैथल, 12 जुलाई (हि.स.)। जिले के गांव सजूमा में पीलिया के बढ़ते मामलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। रविवारतकगांव में 56 बच्चों के बीमार होने के बाद स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से दूषित पेयजल की सप्लाई, जलघर की बदहाल स्थिति और टूटी पेयजल व्यवस्था के कारण गांव में यह स्थिति पैदा हुई है। घरों, गलियों और चौपालों में पीलिया की ही चर्चा हो रही है। बीमार बच्चों का हालचाल जानने के लिए रिश्तेदारों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी गांव पहुंच रहे हैं। रविवार को भाजपा के पूर्व विधायक लीलाराम ने गांव का दौरा किया, जबकि इससे पहले कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला भी प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्होंने घरों में सप्लाई होने वाले पानी का उपयोग लगभग बंद कर दिया है। लोग दो से तीन किलोमीटर दूर से वाहनों में पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। गांव निवासी विजय ने बताया कि उसकी बेटी रीतिका की मौत हो चुकी है, जबकि उसका बेटा अस्पताल में उपचाराधीन है। उनका आरोप है कि दूषित पेयजल की वजह से ही गांव में बीमारी फैली है।

जलघर में मिली गंदगी, टैंकों में काई और मृत जीव

गांव के कुराड़ मार्ग स्थित जलघर की हालत भी गंभीर मिली। जलघर परिसर में गंदगी फैली हुई थी, जबकि वाटर स्टोरेज टैंकों में काई जमी हुई थी और उनमें कीड़े व अन्य मृत जीव पड़े मिले। टैंकों के आसपास उगी झाड़ियां भी लंबे समय से सफाई नहीं होने की गवाही दे रही थीं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने सफाई तब करवाई, जब बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हो गए।

गांव की कई गलियों में जलभराव और सड़कों के किनारे गंदगी के ढेर भी दिखाई दिए, जिन्हें ग्रामीण बीमारी फैलने का प्रमुख कारण मान रहे हैं। गांव की महिलाओं मीना, पूजा, बतेरी, तारो, कुंता, कांता देवी, पिंकी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि कई महीनों से घरों में आने वाले पानी से तेज बदबू आती है। पानी का रंग काला दिखाई देता है और उसमें चिकनाई भी रहती है। उनका कहना है कि इसी पानी से बनाई गई सब्जियां भी कुछ समय बाद खराब हो जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार दूषित पानी के कारण पेट दर्द, दांतों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। महिलाओं का आरोप है कि इस संबंध में पंचायत और जनस्वास्थ्य विभाग को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के पास से माइनर गुजरने के बावजूद आधे से अधिक क्षेत्र तक नहरी पानी की सुविधा नहीं पहुंची है। उनका आरोप है कि गांव को नहरी पानी योजना से जोड़ने के लिए करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाया। उनका कहना है कि यदि समय पर स्वच्छ नहरी पानी उपलब्ध कराया जाता तो हालात इतने गंभीर नहीं होते।

जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ विनोद आर्य ने बताया कि गांव का निरीक्षण कर जलघर परिसर की सफाई करवा दी गई है और वाटर स्टोरेज टैंकों की भी सफाई करवाई जा रही है। जहां-जहां पाइपलाइन में लीकेज मिली, उन्हें ठीक कराया गया है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ घरों में शौचालय के टैंकों की सफाई के दौरान पेयजल पाइपों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका है। विभाग ने विभिन्न स्थानों से पेयजल के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के उपयोग और बीमारी से बचाव के संबंध में जागरूक भी किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

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