कैथल : एचपीएससी-एचएसएससी ‘रिजेक्शन कमीशन’, युवाओं के सपनों का ‘संस्थागत कत्ल’ : आदित्य सुरजेवाला
कैथल, 27 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में कैथल से कांग्रेस के विधायक आदित्य सुरजेवाला ने प्रदेश की भर्ती व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को ‘रिजेक्शन कमीशन’ करार देते हुए आरोप लगाया कि इन संस्थाओं के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के साथ “संस्थागत धोखाधड़ी” की जा रही है।
विधानसभा में लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा का नौजवान दिन-रात मेहनत करता है। अभिभावक जमीन गिरवी रखकर कोचिंग की फीस भरते हैं और बच्चे बड़े सपने लेकर तैयारी करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, अदालती चक्कर और सरकार की खामोशी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक संकट बताया।
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा पीजीटी कंप्यूटर साइंस के 1711 पदों में से केवल 39 उम्मीदवारों का चयन किया गया, यानी 97 प्रतिशत से अधिक पद खाली छोड़ दिए गए। मेवात कैडर में एक भी चयन नहीं हुआ। इसी प्रकार असिस्टेंट प्रोफेसर अंग्रेजी के 613 पदों में से केवल 151 उम्मीदवारों को योग्य घोषित किया गया, जबकि 462 पद रिक्त रह गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एडीओ के 600 में से 550 पद और पीजीटी संगीत के 80 में से 55 पद खाली रहे। कई विषयों में स्वर्ण पदक विजेता और नेट पात्र अभ्यर्थियों को भी अयोग्य घोषित कर दिया गया।
सुरजेवाला ने कहा कि जून 2025 में असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी की परीक्षा रद्द करनी पड़ी। भूगोल के प्रश्नपत्र में 32 प्रश्न बिहार लोक सेवा आयोग से और इतिहास के 24 प्रश्न छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से शब्दशः लिए गए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि हम विद्यार्थियों को नकल न करने की सीख देते हैं, लेकिन आयोग स्वयं नकल कर रहा है।
उन्होंने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर भी सीईटी प्रक्रिया में देरी और लालफीताशाही का आरोप लगाया। उनके अनुसार, ग्रुप डी सीईटी 2022 के बाद केवल एक बार आयोजित हुआ और संशोधित परिणाम आने में दो वर्ष लग गए। ग्रुप सी की प्रथम और द्वितीय चरण की परीक्षाओं के बीच लगभग एक वर्ष का अंतर रहा, जिससे लाखों युवा असमंजस की स्थिति में हैं।
सुरजेवाला ने पावर यूटिलिटीज में एई/एसडीओ के 214 पदों में से 185 पदों पर गैर-स्थानीय उम्मीदवारों के चयन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा का युवा अपने ही राज्य में उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। सामाजिक-आर्थिक आधार पर दिए गए बोनस अंकों को असंवैधानिक घोषित किए जाने से 53,000 पद प्रभावित हुए हैं और लगभग 10,000 कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट खड़ा हो गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

