हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने को ‘जल संरक्षित परियोजना मंजूर

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चंडीगढ़, 20 जून (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा है कि विश्व बैंक द्वारा हरियाणा प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘जल संरक्षित हरियाणा परियोजना 5,714 करोड़ रुपए के अंतर्गत 4000 करोड़ रुपये विश्व बैंक से ऋण की स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना में राज्य के 15 क्लस्टर बनाए है जिनका एरिया 48.94 लाख एकड़ है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को जल संरक्षित हरियाणा परियोजना को लेकर आयोजित अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी भी मौजूद रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पानी का बारीकी से प्रबंध करने की बेहतर योजना बनाएं और उसे ग्राउंड स्तर पर क्रियान्वित करें जिससे हर खेत को पानी सुलभ हो सके। इस प्रकार से डिजिटल वाटर सिस्टम होना चाहिए जिससे प्रदेश में वाटर बजट और उसके उपयोग के बारे में पूरी जानकारी हासिल हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वॉटर कोर्सेस (खालों) को बनाने में गांव की जल समितियों को पूर्ण रूप से भागीदार बनाया जाए और उनके लिए अलग से कोश बनाया जाए। खालों की मरम्मत के लिए सरकार भी इस कोश में अपना हिस्सा देने का कार्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षित हरियाणा प्रोग्राम एक फ्लेेगशीप सघन वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट प्रोग्राम है इसके माध्यम से छह वर्षों के दौरान वर्ष 2026 से 2032 की अवधि में चरणबद्ध रूप से कार्य किया जाएगा। इस राशि का उपयोग नहरी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर किए जाने वाले कार्यों के लिए होगा जिसमें राज्य की शेष 678 नहरों के पुनर्वास किया जाएगा। इसमें विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग 2,484.87 करोड़ रुपए की लागत से 106 नहरें, राज्य बजट से 2,230 करोड़ रुपए की लागत से 293 नहरें तथा नाबार्ड द्वारा 2,350 करोड़ रुपए की लागत से 279 नहरों का पुनर्वास किया जाना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हरियाणा के भिवानी, जीन्द, कैथल, महेन्द्रगढ, रेवाड़ी, चरखी दादरी तथा सिरसा सहित 7 जिलों में लगभग 147 नई वॉटर बॉडी का निर्माण किया जाएगा जिससे ग्राउंड वाटर रिचार्ज होगा। इसके अतिरिक्त, जींद में 2, कैथल में एक और गुरुग्राम के धनवापुर में एक प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से उपचारित जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस प्रकार इन चार एसटीपी से 28 हजार एकड भूमि कवर होगी और इस पर 282.13 करोड़ की लागत आएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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