हिसार में सितारों का जलवा: अनु मलिक, मालिनी अवस्थी और डॉ. द्विवेदी होंगे ‘अक्षरम्-2026’ में शामिल
विश्वविद्यालय में लगेगा फिल्म निर्देशक, संगीतकर
से लेकर प्रसिद्ध लोकगायकों का जमवाड़ा
हिसार, 01 अप्रैल (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय
में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य, संवाद और संस्कृति महोत्सव ‘अक्षरम्-2026’
का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम तीन से पांच अप्रैल तक होगा, जिसमें देशभर से
प्रख्यात कलाकार भाग लेंगे। यह आयोजन विश्विद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई
के मार्गदर्शन में तथा जिल्द संस्थान, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बुधवार काे बताया कि इस
महोत्सव में प्रसिद्ध कलाकार अनु मलिक, मालिनी अवस्थी और डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी
अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे जो विश्विद्यालय के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने बताया
की हरियाणा की भूमि पर कला का संगम एक अनोखा इतिहास रचेगा।
प्रमुख आकर्षण के रूप में अनु मलिक तीन अप्रैल
को कार्यक्रम में शामिल होंगे। अनु मलिक भारतीय संगीत जगत के एक प्रसिद्ध
संगीत निर्देशक और गायक हैं, जिन्होंने 1980 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और
1990 के दशक में विशेष पहचान बनाई। उन्होंने ‘बाज़ीगर’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ और ‘बॉर्डर’ जैसी सुपरहिट फिल्मों
में संगीत दिया है। उन्हें फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा
चुका है। उनका संगीत विविधता के लिए जाना जाता है, जिसमें पॉप, शास्त्रीय और आधुनिक
धुनों का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। इसके अलावा वे “इंडियन आइडल” जैसे रियलिटी शो में
जज के रूप में भी लोकप्रिय रहे हैं।
लोक गायिका मालिनी अवस्थी चार अप्रैल को कार्यक्रम
में शिरकत करेंगी। मालिनी अवस्थी भारत की प्रसिद्ध लोक गायिका हैं, जो मुख्य रूप से
भोजपुरी, अवधी और बुंदेली गीतों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की
शिक्षा प्राप्त की है और अपने मधुर स्वर के माध्यम से लोक संगीत को वैश्विक मंच पर
पहचान दिलाई है। उन्होंने ‘सोहर’, ‘कजरी’, ‘चैती’ जैसे पारंपरिक लोक गीतों को नई पहचान दी है और कई फिल्मों में भी अपनी आवाज
दी है। भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा
है।
डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी 3, 4 और 5 अप्रैल को
कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। डॉ. द्विवेदी एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक
और अभिनेता हैं, जिन्हें 1991 के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘चाणक्य’ से व्यापक पहचान मिली।
उन्होंने न केवल इसका निर्देशन किया बल्कि मुख्य भूमिका भी निभाई। इसके अतिरिक्त उन्होंने
‘पिंजर’ जैसी चर्चित फिल्म
का निर्देशन किया, जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी कृतियों में
भारतीय इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रवाद की गहरी झलक देखने को मिलती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

