हिसार : ज्ञान व सामाजिक विकास का माध्यम होते पुस्तकालय : प्रो. बीआर कम्बोज
हकृवि में दो दिवसीय एएसएलआईपी कॉन्क्लेव का समापन
हिसार, 09 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर
कम्बोज ने कहा है कि डिजिटल एवं ज्ञान आधारित युग में पुस्तकालयों की भूमिका निरंतर
विस्तृत एवं परिवर्तनशील होती जा रही है। पुस्तकालय केवल पुस्तकों का भंडार नहीं बल्कि
ज्ञान, नवाचार और सामाजिक विकास का माध्यम बन चुके हैं।
प्रो. बीआर कम्बोज शुक्रवार को नेहरू पुस्तकालय की ओर से एसोसिएशन ऑफ सीनियर
लाइब्रेरी एंड इनफार्मेशन प्रोफेशनल्स के सहयोग से ‘कोलब्रेटिव इंटेलिजेंस: बिल्डिंग
स्मार्टर लाइब्रेरीज़ टुगेदर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय एएसएलआईपी कॉन्क्लेव-2025 के समापन अवसर पर संबोधन
दे रहे थे। कॉन्क्लेव में एएसएलआईपी के अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार व सचिव डॉ. राज कुमार
उपस्थित रहे। कुलपति ने बताया कि पुस्तकालय शिक्षा, अनुसंधान, मनोरंजन और सांस्कृतिक
विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पुस्तकालय ज्ञान का प्रसार और संरक्षण
करने, संस्कृति और संस्कारों का विकास करने, समाज का बौद्धिक विकास करने में महत्वपूर्ण
योगदान देते हैं।
कुलपति ने बताया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अपने अध्ययन,
शोध और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकालय एक उपयुक्त स्थल है। पुस्तकालय
व्यक्ति के नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने
बताया कि पुस्तकालय प्राचीन और आधुनिक पुस्तकों, पांडुलिपियों और दस्तावेजों को सुरक्षित
रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। लाइब्रेरी तेजी से स्मार्ट, सहयोगी और प्रौद्योगिकी
संचालित ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र में विकसित हो रही हैं। कॉन्क्लेव में डॉ. वेंकट राव पोकरी, श्रीमती राज टिहरी,
डॉ .परमिंदर कौर सैनी, जहांगीर ख़ान, डॉ. दीप्ति मदान, डॉ. राजीव पटेरिया, डॉ. सीमा
परमार, त्रिदीब चट्टोपाध्याय व सरदार जंग बहादुर सिंह पन्नू को अवार्ड देकर सम्मानित
किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

