हिसार में जिला बार एसोसिएशन का वर्क सस्पेंड, जारी रहा सांकेतिक धरना
छात्रों की मांगों के समर्थन में डटे रहे वकील
हिसार, 24 जुलाई (हि.स.)। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा बचाओ आंदोलन के
दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध और उनकी मांगों के समर्थन में जिला बार
एसोसिएशन हिसार का सांकेतिक धरना शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। जनरल हाउस
के सर्वसम्मत निर्णय के तहत अधिवक्ताओं ने वर्क सस्पेंड रखा तथा न्यायालयों में केवल
आवश्यक मामलों में प्रॉक्सी वकीलों के माध्यम से औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई। नियमित
न्यायिक कार्य से विरत रहकर अधिवक्ताओं ने आंदोलनरत छात्रों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त
किया।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट प्रदीप बाजिया, उप प्रधान एडवोकेट राहुल
सिंह, सचिव एडवोकेट समीर सिहाग, सहसचिव एडवोकेट साहिल मंडेरना तथा कोषाध्यक्ष एडवोकेट
आशा बाल्यान ने संयुक्त रूप से कहा कि देशभर के छात्र अपने भविष्य की सुरक्षा, निष्पक्ष
परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। ऐसे लोकतांत्रिक आंदोलन पर बल प्रयोग
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
बार एसोसिएशन ने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक
जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। साथ ही नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं
में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए, पेपर लीक रोकने के लिए कठोर
एवं प्रभावी कानून बनाए जाएं, जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों
के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, आंदोलनरत छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं तथा
प्रभावित विद्यार्थियों और उनके परिवारों को न्याय सुनिश्चित किया जाए।
प्रधान एडवोकेट प्रदीप बाजिया और सचिव एडवोकेट समीर सिहाग ने कहा कि केवल नए
कानून बनाने या आश्वासन देने से छात्रों का विश्वास वापस नहीं आएगा। उनका कहना था कि
जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और परीक्षा प्रणाली
में व्यापक सुधार लागू नहीं किए जाते, तब तक छात्रों की मूल मांगें पूरी नहीं मानी
जा सकतीं। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना केवल घोषणाएं करने से देश के युवाओं
का भरोसा बहाल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा संबंधी विवादों
ने केंद्र सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। देर रात्रि प्रधानमंत्री
द्वारा की गई घोषणाओं के बावजूद छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बना हुआ है। देशभर
में छात्र संगठन, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक दल शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही
सुनिश्चित करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं।
बार पदाधिकारियों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय समय-समय
पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के महत्व पर टिप्पणी कर चुके हैं। इसलिए
सरकार को केवल तात्कालिक घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय ऐसी संस्थागत व्यवस्था विकसित
करनी चाहिए, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
धरना एवं वर्क सस्पेंड कार्यक्रम में प्रधान एडवोकेट प्रदीप बाजिया, उपप्रधान
एडवोकेट राहुल सिंह, सचिव एडवोकेट समीर सिहाग, सहसचिव एडवोकेट साहिल मंडेरना, कोषाध्यक्ष
एडवोकेट आशा बाल्यान सहित एडवोकेट कलम सिंह, सहित बड़ी संख्या में
अधिवक्ता उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

