हिसार : रबी की फसल में बदलेगी खेती की तस्वीर, एचएयू ने मंजूर की 21 नई सिफारिशें

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हिसार : रबी की फसल में बदलेगी खेती की तस्वीर, एचएयू ने मंजूर की 21 नई सिफारिशें


हिसार : रबी की फसल में बदलेगी खेती की तस्वीर, एचएयू ने मंजूर की 21 नई सिफारिशें


गेहूं, सरसों, गन्ना और चारा फसलों की खेती को लेकर वैज्ञानिकों ने सुझाई नई

तकनीकें

आगामी सीजन में किसानों तक पहुंचेंगी सिफारिशें

हिसार, 10 सितंबर (हि.स.)। आगामी रबी सीजन में किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने

और खेती की लागत कम करने के लिए नई तकनीकों का लाभ मिलेगा। यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय

में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला रबी-2026 में वैज्ञानिकों

और कृषि अधिकारियों के मंथन के बाद विभिन्न फसलों से जुड़ी 21 नई सिफारिशों को मंजूरी

दी गई। इनमें गेहूं, सरसों, गन्ना, राया, जई सहित अन्य फसलों की बेहतर पैदावार के लिए

बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन, कतार दूरी और सिंचाई से जुड़ी तकनीकें शामिल हैं।

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि इन सिफारिशों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा,

जब नई तकनीकों को समय पर किसानों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और कृषि

एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों से स्वीकृत सिफारिशों का खेत स्तर तक प्रचार-प्रसार

सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारियों से मिलने वाला किसानों की

समस्याओं का फीडबैक शोध और नई तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण है। भविष्य में इस

फीडबैक तंत्र को डिजिटल माध्यम से और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।

विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने बताया कि कार्यशाला में छह तकनीकी

सत्र आयोजित किए गए। इनमें गेहूं एवं जौ, गन्ना-मक्का, दलहनी एवं चारा फसलें, तिलहन,

एग्रोफोरेस्ट्री और शुष्क खेती पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग

के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिंहाग ने कहा कि नई सिफारिशों को जल्द किसानों तक

पहुंचाया जाएगा, ताकि आगामी रबी सीजन में उनका लाभ मिल सके।

सरसों की हाइब्रिड किस्म से लेकर खारे पानी के प्रबंधन तक सुझाव

कार्यशाला में एचएयू की पहली हाइब्रिड सरसों किस्म आरएचएच 2101 को सिंचित क्षेत्रों

में समय पर बुवाई के लिए अनुशंसित किया गया। यह किस्म 135 से 142 दिन में तैयार होती

है और प्रति एकड़ 11.5 से 12 क्विंटल तक उपज देने में सक्षम है। गन्ने की सीओएच

179 किस्म को बसंतकालीन बुवाई के लिए उपयुक्त बताया गया है, जिसकी औसत उपज 450 क्विंटल

प्रति एकड़ है।

गेहूं में 6-7 डेसीसीमेंस प्रति मीटर विद्युत चालकता वाले लवणीय सिंचाई जल

की स्थिति में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की सिफारिश की गई है। इसके तहत बीज उपचार के

साथ गोबर की खाद और 75 प्रतिशत अनुशंसित उर्वरक मात्रा का प्रयोग करने की सलाह दी गई

है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए बेहतर पैदावार हासिल की जा सकती है।

सरसों में डीएपी के साथ जिप्सम के विकल्प के तौर पर 12 किलोग्राम बेंटोनाइट

सल्फर प्रति एकड़ प्रयोग की सिफारिश की गई। चारा फसल जई में एचएयू एनपीके बायोफर्टिलाइजर

से बीज उपचार तथा गेहूं में एचएयू एजोटिका प्लस-ई के प्रयोग की सिफारिश की गई है। बसंतकालीन

गन्ने में 90 सेंटीमीटर कतार दूरी और 30-35 क्विंटल प्रति एकड़ बीज दर अपनाने की सलाह

दी गई है।

इसके अलावा हरियाणा के भूजल गुणवत्ता मानचित्र के संशोधन एवं अद्यतनीकरण की

सिफारिश की गई, ताकि भूमिगत खारे पानी के उचित उपयोग और प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा

सके। सिंचित राया में 45 सेंटीमीटर कतार दूरी रखने तथा राया और सरसों के लिए एक किलोग्राम

प्रति एकड़ बीज दर की सिफारिश भी की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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