प्रकृति संरक्षण, जीवों के प्रति करुणा और नैतिक मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने की जरुरत : प्रो. विजय कुमार
हवन और जम्भवाणी पाठ के साथ
मनाया गया गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के लिए
सामूहिक प्रयासों को बताया जरूरी
हिसार, 21 अक्टूबर (हि.स.)। यहां के गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह-2026 आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं
के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरु जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान में
हवन-यज्ञ एवं जम्भवाणी पाठ का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्वविद्यालय
की निरंतर प्रगति, शैक्षणिक उत्कृष्टता और जनकल्याण की कामना की गई। आयोजन के माध्यम
से सद्भाव, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश भी दिया गया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कुमार मुख्य यजमान रहे, जबकि
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने अध्यक्षता की। कार्यक्रम का आयोजन बुधवार काे गुरु जम्भेश्वर जी महाराज
धार्मिक अध्ययन संस्थान एवं सामान्य शाखा की ओर से आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ
तथा डीन अकादमिक के संयुक्त प्रयासों से किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न
संकायों के डीन, निदेशक, चेयरमैन, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि स्थापना दिवस किसी भी शैक्षणिक संस्थान
के लिए अपनी उपलब्धियों की समीक्षा करने और भविष्य के लक्ष्यों के प्रति नए संकल्प
लेने का अवसर होता है। विश्वविद्यालय की सफलता केवल शिक्षा और शोध के परिणामों तक सीमित
नहीं है, बल्कि समाज के प्रति उसकी संवेदनशीलता, विद्यार्थियों में विकसित होने वाले
जीवन मूल्यों और राष्ट्र के विकास में उसके योगदान से भी आंकी जाती है। उन्होंने गुरु
जम्भेश्वर जी महाराज की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण, जीवमात्र
के प्रति करुणा और नैतिक आचरण के आदर्श वर्तमान समय में विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।
इन मूल्यों को शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़कर विश्वविद्यालय सतत विकास में महत्वपूर्ण
भूमिका निभा सकता है।
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि किसी भी संस्थान की प्रगति सामूहिक प्रयास,
अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सकारात्मक कार्यसंस्कृति पर निर्भर करती है। स्थापना दिवस
विश्वविद्यालय परिवार को साझा उद्देश्यों के प्रति पुनः प्रतिबद्ध होने की प्रेरणा
देता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और विद्यार्थियों
के सर्वांगीण विकास के लिए सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय
जरूरी है। गुरु जम्भेश्वर जी महाराज की शिक्षाएं सद्भाव, संयम, सेवा और प्रकृति के
प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। इन आदर्शों को व्यवहार में अपनाकर विश्वविद्यालय
अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा को और मजबूत कर सकता है।
हवन-यज्ञ एवं जम्भवाणी पाठ के माध्यम से सकारात्मक चिंतन, सामाजिक समरसता और
लोककल्याण की भावना को अभिव्यक्त किया गया। समारोह में यह संदेश दिया गया कि आधुनिक
शिक्षा की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब उसके साथ नैतिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और
सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय हो। स्थापना दिवस समारोह विश्वविद्यालय की उपलब्धियों
के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ ज्ञान, अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा
के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के संकल्प का अवसर बना।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

