हिसार: आयुर्वेद में औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का विशेष महत्व : कुलसचिव

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हिसार: आयुर्वेद में औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का विशेष महत्व : कुलसचिव


हकृवि में आयुर्वेद दिवस पर कार्यशाला का आयोजन

हिसार, 23 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं

मानविकी महाविद्यालय में आयुर्वेद दिवस-2026 के उपलक्ष्य में कार्यशाला आयोजित की गई।

औषधीय, सुगंध एवं क्षमतावान फसल अनुभाग, अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग द्वारा ट्टएक

सेहतमंद कल की शुरुआत, चमत्कारी आयुर्वेद के साथट्ट विषय पर आयोजित कार्यशाला में कुलसचिव

डॉ. पवन कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर मुख्य वक्ता डॉ. महिपाल

सिंह (एएएमसी), अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पाहुजा, समाजसेवी

सुमित्रा मंगाली व डॉ. एएस ढांडा मौजूद रहे।

कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने बुधवार काे अपने सम्बोधन में कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन

चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। इसका मूल उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं बल्कि

स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोग का उपचार करना है। उन्होंने कहा

कि आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। आयुर्वेद में औषधीय पौधों

और प्राकृतिक संसाधनों का विशेष महत्व है। भारत की जैव विविधता ने इस परंपरा के विकास

में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इस समृद्ध विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान

के साथ जोडक़र प्रमाण आधारित तरीके से आगे बढऩे का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान

समय में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, अनुसंधान और प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों

की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. महिपाल सिंह ने विभिन्न प्रकार की बीमारियों एवं उनके उपचार

में आयुर्वेद की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आयुर्वेद हमें यह सिखाता

है कि स्वास्थ्य केवल रोग का अभाव नहीं है, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली के बीच संतुलन

का नाम है। हमारे ऋ षियों ने प्रकृति का गहन अध्ययन किया और यह समझने का प्रयास किया

कि मानव जीवन प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा है। इसलिए आयुर्वेद में

प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, व्यायाम, पर्याप्त नींद और

मानसिक शांति को विशेष महत्व दिया गया है।

अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने अपने सम्बोधन में कहा कि औषधीय एवं सुगंधित

फसलों को बढ़ावा देकर किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक एवं लाभकारी कृषि

विकल्प उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान, तकनीकी

मार्गदर्शन तथा नवीन कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में समाजसेवी सुमित्रा मंगाली व डॉ. एएस ढांडा ने भी अपने विचार रखे। विभागाध्यक्ष

डॉ. एसके पाहुजा ने कार्यक्रम में सभी का स्वागत किया और आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार

से प्रकाश डाला। मंच संचालन एवं धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. राजेश आर्य ने पारित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक, मौलिक

विज्ञान व मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, कृषि अभियांत्रिकी एवं

प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय विशिष्ट सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष,

वैज्ञानिक, शिक्षक, गैर शिक्षक कर्मचारी एवं किसान उपस्थित रहें।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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