हिसार : सरकार ने शिक्षा को नजदरअंदाज किया, साक्षरता में 20वें नंबर पर आया प्रदेश
एक लाख 22 हजार 359 पदों में से 40 हजाार 671 स्कूल टीचरों के पद अभी खाली
हिसार, 13 जनवरी (हि.स.)। राज्य के पूर्व मंत्री एवं इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक
प्रो. संपत सिंह ने कहा है कि हरियाणा सरकार ने फंड का आवंटन बहुत कम करके और चुपचाप
जिम्मेदारी प्राइवेट संस्थाओं को सौंपकर शिक्षा को नज़रअंदाज़ कर दिया है। उन्होंने
कहा कि हरियाणा, जो प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश के सबसे समृद्ध राज्यों में
से एक था, अब साक्षरता दर में 20वें स्थान पर आ गया है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है
कि पिछले कुछ वर्षों में प्री-प्राइमरी से लेकर यूनिवर्सिटी लेवल तक शिक्षा क्षेत्र
को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया गया है।
प्रो. संपत सिंह ने मंगलवार को खुलासा करते हुए बताया कि हालात इतने खराब हो
गए हैं कि तथाकथित 6000 प्ले-वे स्मार्ट स्कूलों (प्री-प्राइमरी संस्थानों) को उनके
सामान्य कामों के अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंप दिया गया है। इन प्री-प्राइमरी
शिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षित नर्सरी शिक्षकों की ज़रूरत थी लेकिन, कम पढ़े-लिखे
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को यह काम सौंप दिया गया है।
प्रो. सिंह के अनुसार शिक्षा विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मंज़ूर एक
लाख 22 हजार 359 पदों में से 40 हजाार 671 स्कूल टीचरों के पद अभी खाली थे। इसके अलावा,
दशकों पहले बनी स्कूल की इमारतों के रखरखाव की कमी के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर खराब हो
रहा था। पिछले मॉनसून की बाढ़ के दौरान हरियाणा के 500 से ज़्यादा स्कूल हफ़्तों तक
पानी में डूबे रहे। उन्होंने कहा कि ऑडिट की गई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में शिक्षा के
लिए फंड का हिस्सा बजट के 11.9 प्रतिशत से घटकर 8.7 प्रतिशत हो गया था। वर्ष
2024-25 की रिपोर्ट का अभी तक ऑडिट नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि प्रदेश
की तीसरी सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी, मदिव का अस्तित्व भी हरियाणा सरकार के ढीले रवैये
के कारण गहरे फाइनेंशियल और एजुकेशनल संकट का सामना कर रहा है। इस मौजूदा वित्त वर्ष
के आखिर तक एमडीयू को 269 करोड़ का भारी घाटा होगा। तब भी जब मंज़ूर पोस्ट में से
205 बजट और 133 एसएफएस टीचिंग पोस्ट खाली पड़ी हैं। इसी तरह, 1102 नॉन-टीचिंग पोस्ट
अभी भी भरी जानी हैं। पिछले पांच सालों में कोई नई नियुक्ति नहीं की गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

