हिसार : पशुओं के सुरक्षित रक्त प्रबंधन के लिए विकसित उपकरण को मिला डिज़ाइन पेटेंट
हिसार स्थित लुवास के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि
हिसार, 20 मई (हि.स.)। हिसार स्थित लाला लाजपत
राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) ने एक बार फिर पशु चिकित्सा
अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ‘पालतू पशुओं के रक्त संग्रह एवं रक्त चढ़ाने संबंधी उपकरण’ को भारत सरकार के पेटेंट
कार्यालय से डिज़ाइन पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय
के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पशु चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी सुधार और आधुनिक चिकित्सा
प्रणाली की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह डिज़ाइन पेटेंट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक
डॉ. तरुण कुमार, डॉ. सुनील पूनिया, डॉ. शिविका गुप्ता, डॉ. अंकित मगोत्रा, डॉ. अंकित
कुमार, डॉ. नीलेश सिंधु एवं डॉ. दिव्या अग्निहोत्री को प्रदान किया गया है। आज के समय
में पशुओं में रक्त संग्रहण और रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील मानी जाती
है। संक्रमण, रक्त की बर्बादी तथा तकनीकी असुविधाओं जैसी कई चुनौतियां पशु चिकित्सकों
के सामने रहती हैं। ऐसे में लुवास के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह विशेष उपकरण इन
समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस उपकरण को इस
प्रकार डिजाइन किया गया है कि रक्त संग्रहण और रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित,
सरल, सुविधाजनक और प्रभावी बन सके।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद संबंधित वैज्ञानिकों
ने बुधवार काे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। कुलपति
ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शोध क्षमता और
नवाचार आधारित कार्य संस्कृति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि लुवास लगातार पशु चिकित्सा
एवं पशुपालन क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा दे रहा है और वैज्ञानिकों का
यह प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।
कुलपति ने यह भी कहा कि आधुनिक पशु चिकित्सा
सेवाओं में तकनीकी नवाचारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे उपकरण पशुओं के उपचार
को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य
में भी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इसी प्रकार के उपयोगी अनुसंधान करते रहेंगे।
इस अवसर पर मानव संसाधन एवं प्रबंधन निदेशिका
डॉ. सोनिया सिंधु भी उपस्थित रहीं। उन्होंने वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि
विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका परिणाम
अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है।
विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञान सिंह ने बताया कि यह
उपकरण विशेष रूप से पशु चिकित्सकों, पशु चिकित्सालयों और पशु देखभाल केंद्रों के लिए
उपयोगी सिद्ध होगा। इसके प्रयोग से संक्रमण की संभावना कम होगी तथा रक्त के सुरक्षित
प्रबंधन में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार के दौरान सुरक्षित रक्त
प्रबंधन बेहद जरूरी होता है और यह उपकरण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

