मध्य पूर्व एशिया से हरियाणा में तारकोल की आपूर्ति आधी हुई,विदेशी तारकोल से बनेंगी सड़कें
चंडीगढ़, 18 अप्रैल (हि.स.)। मध्य पूर्व एशिया में युद्ध के चलते हरियाणा में तारकोल की आपूर्ति 50 प्रतिशत तक घट गई है। कीमतें भी 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं। ऐसी स्थिति में सड़कों का निर्माण कार्य प्रभावित नहीं होने देने के लिए प्रदेश सरकार ने छह महीने के लिए बाहर से मंगाए गए (आयातित) तारकोल के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को चंडीगढ़ में सड़क निर्माण व रखरखाव से संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक में विदेशी काेयले के इस्तेमाल की स्वीकृति दे दी। बैठक में बताया गया कि 28 फरवरी को तारकोल के दाम 46 हजार 402 रुपये टन थे जो एक अप्रैल को 76 हजार 152 रुपये प्रति टन हो गए हैं। ऐसी परिस्थिति में केंद्र सरकार ने भी आयातित तारकोल के इस्तेमाल की मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में सड़कों के गड्ढ़े भरवाने तथा अन्य मरम्मत कार्यों के लिए पैच वर्क मशीनों का इस्तेमाल करें। इन मशीनों के लिए लोक निर्माण विभाग से संपर्क कर सकते हैं। हर विभाग अपने कार्यों की मासिक प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से उनके पास भिजवाए। ‘म्हारी सड़क’ एप पर मिली सभी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए इनका समाधान करवाया जाए। जिन सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी इनका निर्माण करने वाली कंपनी की होती है, उन कंपनियों के माध्यम से आवश्यक मरम्मत कार्य त्वरित गति से करवाए जाएं।शहरी क्षेत्रों में किस सड़क की जिम्मेदारी किस विभाग की है, इस संशय को दूर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने को कहा है। सभी शहरी क्षेत्रों में कुछ स्मार्ट रोड बनाए जाएंगे ताकि शहरों की सुंदरता तथा आमजन की सुविधाओं को बढ़ाया जा सके।
63 हजार 170 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत और निर्माण होगा
चालू वित्त वर्ष में 63 हजार 170 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत और निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। यदि किसी तकनीकी पेंच के चलते जिला परिषद से संबंधित सड़क के प्रशासनिक अनुमोदन में कोई दिक्कत आती है तो संबंधित उपायुक्त को उसके अनुमोदन के लिए अधिकृत किया जाएगा। सभी विभागों को पीडब्ल्यूडी के मानकों के अनुरूप सड़क निर्माण करवाने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून से पहले सभी कार्य पूरे करने होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

