रोहतक : सुपवा देगी संस्थानिक स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा

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क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत अंतर-संस्थागत साझेदारी करेंगे

छात्रों, संकाय व फैकेल्टी की नवाचारी और उद्यमिता क्षमता का करेंगे विकास

रोहतक, 22 मार्च (हि.स.)। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) ने संस्थानिक स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसके तहत क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत आंतरिक व अंतर संस्थागत साझेदारियां की जाएंगी। ताकि, सुपवा के छात्रों, संकाय व फैकेल्टी की नवाचारी और उद्यमिता क्षमता का और अधिक विकास किया जा सके। यह निर्णय यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की बैठक में लिया गया।

डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने रविवार काे बताया कि भारत सरकार देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके मद्देनजर छात्र-चालित नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों और संकाय को नवाचार व उद्यमिता गतिविधियों में शामिल करने के लिए सुपवा अपने स्तर पर प्लेटफॉर्म मुहैया कराएगी। इन्हें कोई दिक्कत न आए, इसलिए एक मजबूत नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाया गया है। डॉ आर्य ने कहा कि संस्थानिक स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप पॉलिसी के तहत प्री-इंकेबेशन व इंक्यूबेशन समर्थन प्रणालियां, नवाचार व स्टार्टअप में शामिल संकाय व छात्रों के लिए प्रोत्साहन, संस्थानों व इंक्यूबेटेड स्टार्टअप के बीच आईपी स्वामित्व, राजस्व साझा करने व इक्विटी साझा करने की प्रणालियां विकसित की जाएंगी। यह छात्रों, संकाय व हितधारकों के बीच नवाचार का समर्थन करने और स्टार्टअप को पोषित करने के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र साबित होगा।

डॉ आर्य ने कहा कि सुपवा के छात्रों के पाठ्यक्रम के अनुसार ही नवाचार व उद्यमिता परियोजनाएं तैयार की जाएंगी, जिससे छात्रों में उद्यमिता कौशल व व्यावसायिक सूझबूझ विकसित करने में मदद मिल सके। इसमें छात्रों की रचनात्मक समस्या, समाधान क्षमता व उद्यमिता मानसिकता का उपयोग करने और इकोसिस्टम सक्षम करने वालों व विभिन्न हिस्सेदारों के साथ क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत आंतरिक और अंतर-संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। डॉ आर्य ने कहा कि नवाचार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को बनाने, सुव्यवस्थित करने और मजबूत करने की दिशा में कार्य करेंगे। यह पॉलिसी उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र छात्रों, संकाय व फैकेल्टी की नवाचारी व उद्यमिता क्षमता को पहचानने, मार्गदर्शन देने, पोषित करने और उन्हें स्टार्ट-अप उद्यमियों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके लिए वित्त पोषण, निवेश के अवसर व नेटवर्किंग का कार्य सुपवा करेगी, ताकि नवाचार व उद्यम सफल हो सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल

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