हरियाणा: पराली जलाने की घटनाओं में 91 प्रतिशत कमी
-78 बड़ी एवं मध्यम यांत्रिक रोड स्वीपिंग मशीनें तैनात
चंडीगढ़, 25 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा में वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2025 में धान की पराली जलाने की घटनाओं में 91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्य में निर्धारित मानकों के अनुसार, आवश्यक 81 बड़ी एवं मध्यम यांत्रिक रोड स्वीपिंग मशीनों में से 78 तैनात की जा चुकी हैं, जबकि 1,162 किलोमीटर चिन्हित सडक़ों में से 675 किलोमीटर का पुनर्विकास कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही, राज्य में 1,309 औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी की जा रही है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण प्रबंधन संबंधी उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में भाग लेने के बाद यह जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में लगभग 79.7 लाख टन धान की पराली उत्पन्न होती है। इसके प्रबंधन की योजना के तहत 55 प्रतिशत पराली का प्रबंधन इन-सीटू, 33 प्रतिशत का एक्स-सीटू उपयोग तथा 12 प्रतिशत का उपयोग चारे के रूप में किए जाने का प्रावधान है।
वर्ष 2026 के लिए सरकार ने 9,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 7,950 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की खरीद की है। पराली के एक्स-सीटू उपयोग में भी निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2023 में 13.2 लाख टन, वर्ष 2024 में 15.5 लाख टन तथा वर्ष 2025 में 21.9 लाख टन पराली का एक्स-सीटू उपयोग किया गया, जबकि वर्ष 2026 में इसके 27.1 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निगरानी को और मजबूत करने के लिए लगभग 50 ड्रोन तैनात किए जाएंगे। हॉटस्पॉट गांवों में कम लागत वाले पीएम 2.5 सेंसर लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, जले हुए क्षेत्रों का जमीनी सत्यापन इसरो द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने बताया कि अगस्त 2026 तक ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग 5.89 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो निर्धारित पांच प्रतिशत मानक से अधिक है। एनसीआर से बाहर हरियाणा के ईंट-भट्टों में बायोमास को-फायरिंग 21.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसे 1 नवंबर से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार द्वारा सडक़ों से उठने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए भी व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। कुल 1,162 किलोमीटर सडक़ों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है, जिनमें से 675 किलोमीटर का पुनर्विकास कार्य पूरा हो चुका है, जो लगभग 58 प्रतिशत है। इसके साथ ही रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जा रहा है, जिसके तहत सडक़ों के पुनर्विकास, गड्ढों एवं क्षतिग्रस्त फुटपाथों की मरम्मत तथा सडक़ अवसंरचना के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण उपायों के संबंध में उन्होंने बताया कि राज्य में 1,309 औद्योगिक इकाइयां औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण समीक्षा के दायरे में हैं। इनमें से 192 इकाइयों को छूट दी गई है अथवा उनके पास पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाएं प्रमाणित की गई हैं। शेष 1,117 इकाइयों में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की आवश्यकता है, जिनमें से 383 मामलों में उपकरणों की खरीद के आदेश दिए जा चुके हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

