कैथल: जांच एजेंसियों के नाम पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर हो रही ठगी, सतर्क रहें: एसपी उपासना

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कैथल: जांच एजेंसियों के नाम पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर हो रही ठगी, सतर्क रहें: एसपी उपासना


कैथल, 03 जनवरी (हि.स.)।

साइबर ठग अब जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर आमजन को डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। इस संबंध में एसपी उपासना ने नागरिकों को सतर्क रहने की अपील करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है।

एसपी उपासना ने शनिवार को जारी जानकारी में बताया कि हाल के दिनों में एक नए प्रकार के साइबर अपराध की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसमें साइबर अपराधी कॉल या व्हाट्सएप/वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और खुद को एनसीबी, सीबीआई, एनआईए जैसी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं। जालसाज यह कहकर डराते हैं कि आपके पैन या आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नारकोटिक्स (नशीली सामग्री) से भरा पार्सल भेजा गया है, जिसे पकड़ा गया है।

ठग कभी कोर्ट फीस, कभी जमानत और कभी केस से नाम हटाने के नाम पर पैसे की मांग करते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस अधिकारी दिखाकर एक नकली नोटिस थमा दिया जाता है और पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ बताते हुए घर के किसी कमरे में बंद रहने को कहा जाता है। कैमरे के सामने रहने, किसी से बात न करने और कमरे में किसी के आने पर गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है।

डर के माहौल में पीड़ित से उसकी निजी जानकारी, बैंक खातों और निवेश से जुड़ा विवरण हासिल कर लिया जाता है। अंत में यह कहकर कि जांच पूरी होने तक पैसा आरबीआई या भारत सरकार के खाते में जमा कर दें, मोटी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती है। जांच के बाद पैसा लौटाने का झांसा दिया जाता है।

एसपी उपासना ने साफ कहा कि कोई भी सरकारी संस्था या जांच एजेंसी कभी भी नागरिकों से निजी पैसा किसी खाते में जमा कराने की सलाह नहीं देती। अनजान नंबरों से आने वाले कॉल, व्हाट्सएप/वीडियो कॉल या टेलीग्राम कॉल न उठाएं। किसी के कहने पर डरकर खुद को बंद न करें और न ही आधार, बैंक खाता या अन्य निजी जानकारी साझा करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

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