हिसार : देशभर के किसानों तक पहुंचेगा एचएयू का उन्नत बाजरा बीज

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हिसार : देशभर के किसानों तक पहुंचेगा एचएयू का उन्नत बाजरा बीज


एचएचबी-299 और एचएचबी-67 संशोधित-2 हाइब्रिड किस्मों का होगा बड़े स्तर पर

उत्पादन व विपणन

कम लागत में अधिक पैदावार और बेहतर पोषण मिलेगा किसानों को

हिसार, 29 जुलाई (हि.स.)। यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित

उन्नत हाइब्रिड बाजरा किस्में एचएचबी-299 और एचएचबी-67 संशोधित-2 अब देशभर के किसानों

तक बड़े पैमाने पर पहुंचेंगी। विश्वविद्यालय ने इन उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के बीज

उत्पादन एवं विपणन के लिए आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित चक्रा सीड्स के साथ महत्वपूर्ण

समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से किसानों को समय पर प्रमाणित

एवं गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध होंगे, जिससे बाजरा उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने

में मदद मिलेगी।

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज की उपस्थिति में बुधवार काे हुए समझौते पर विश्वविद्यालय की

ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग व चक्रा सीड्स की ओर से प्रोपराइटर गणेश कुमार

रेड्डी ने हस्ताक्षर किए। कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य

और किसानों की जरूरतों को देखते हुए विश्वविद्यालय लगातार अधिक उपज देने वाली, रोग

प्रतिरोधी तथा जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों का विकास कर रहा है।

निजी बीज कंपनियों के

साथ तकनीकी साझेदारी से इन उन्नत किस्मों का तेजी से विस्तार होगा और अधिक किसान इसका

लाभ उठा सकेंगे।

मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव ने बताया कि एचएचबी-299 एक उच्च

उत्पादक एवं जोगिया रोग प्रतिरोधी संकर बाजरा किस्म है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसमें

73 पीपीएम लौह (आयरन) की उच्च मात्रा है, जिससे यह पोषण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण

है। यह किस्म 80 से 82 दिनों में तैयार हो जाती है तथा बेहतर प्रबंधन के साथ 49 मन

प्रति एकड़ तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसके सिट्टे शंक्वाकार और मध्यम लंबे

होते हैं, जो बेहतर दाना उत्पादन में सहायक हैं।

बाजरा अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि एचएचबी-67 संशोधित-2 पूर्व

विकसित एचएचबी-67 संशोधित का जोगिया रोग प्रतिरोधी उन्नत संस्करण है। इसे वर्ष

2021 में हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के बारानी क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किया गया

था। यह किस्म अतिशीघ्र पकने वाली, सूखा सहनशील, बेहतर दाना एवं चारा गुणवत्ता वाली

है तथा अगेती, मध्यम और पछेती बुवाई—तीनों परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है। इसके दानों की औसत

उपज 20 मन प्रति एकड़ तथा सूखे चारे की औसत उपज 52 मन प्रति एकड़ है। बेहतर प्रबंधन

के साथ यह और अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ बाजरा की अन्य प्रमुख बीमारियों के प्रति

भी प्रतिरोधी है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि इस समझौते के बाद इन उन्नत हाइब्रिड किस्मों

का बड़े स्तर पर उत्पादन और वितरण संभव होगा, जिससे देशभर के किसानों को उच्च गुणवत्ता

वाले बीज उपलब्ध होंगे और बाजरा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर ओएसडी

डॉ. अतुल ढींगड़ा, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, डॉ. एसके पाहुजा,

डॉ. नीरज कुमार, डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल तथा डॉ. देवव्रत यादव सहित विश्वविद्यालय

के अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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