हिसार : महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी समाज को दिखाती सही राह : प्रो. बीआर कम्बोज
हकृवि में भगवान वाल्मीकि के प्रकट दिवस पर विचार गोष्ठी आयोजित
कार्यक्रम में उत्कृष्ट कर्मचारियों को किया सम्मानित
हिसार, 23 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अभियांत्रिकी
एवं तकनीकी महाविद्यालय में भगवान वाल्मीकि के पावन प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार काे विचार
गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज
मुख्य अतिथि रहे, जबकि कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने अध्यक्षता की। सामाजिक विचारक सतीश
ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। गोष्ठी में महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनकी
शिक्षाओं और भारतीय संस्कृति एवं साहित्य में उनके अमूल्य योगदान को याद किया गया।
कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति, साहित्य
और आध्यात्मिक परंपरा के महान ऋषि थे। उनके द्वारा रचित रामायण भारतीय जीवन-दर्शन,
नैतिक मूल्यों और आदर्श सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। रामायण केवल एक महाकाव्य
नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला ऐसा ग्रंथ है, जिसकी शिक्षाएं हर युग में प्रासंगिक
रही हैं। इसमें निहित सत्य, कर्तव्यनिष्ठा, मर्यादा, त्याग और मानवता के आदर्श आज भी
समाज को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के
विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और भाईचारे
को मजबूत किया जा सकता है। उनके जीवन और रचनाओं से मिलने वाली प्रेरणा वर्तमान समय
में भी नैतिक मूल्यों को बनाए रखने तथा एक बेहतर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाती है। इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट कर्मचारियों को स्मृति
चिह्न देकर सम्मानित किया।
मुख्य वक्ता सामाजिक विचारक सतीश ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन को ज्ञान, साधना
और आत्मपरिवर्तन की प्रेरणादायक मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं
मानवता, नैतिकता, सदाचार और समानता का संदेश देती हैं। रामायण में भगवान श्रीराम का
चरित्र मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा की सीख देता है, जबकि माता सीता का जीवन धैर्य, दृढ़
संकल्प और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि रामायण के प्रसंग आज भी
व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग
रहने की सीख देते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि
का प्रकट दिवस भारतीय संस्कृति और समृद्ध साहित्यिक परंपरा को स्मरण करने के साथ-साथ
उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का अवसर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, सामाजिक सद्भाव,
समानता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देकर ही एक बेहतर समाज की स्थापना की जा सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

