हांसी : पैदल चलकर पढ़ाई और काम करने को मजबूर था चिराग, एसडीएम ने थामी मदद की डोर

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हांसी : पैदल चलकर पढ़ाई और काम करने को मजबूर था चिराग, एसडीएम ने थामी मदद की डोर


जर्जर मकान की मदद मांगने पहुंचा था कार्यालय

बातचीत में सामने आई परेशानी तो एसडीएम राजेश खोथ ने तुरंत दिलाई साइकिल

हांसी, 06 अक्टूबर (हि.स.)। जर्जर मकान की मरम्मत

के लिए सरकारी मदद की उम्मीद लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा गांव सैनीपुरा का चिराग मंगलवार

को एक ऐसी मदद लेकर लौटा, जिसकी उसे शायद उम्मीद भी नहीं थी। पिता के लकवे की बीमारी

के कारण पढ़ाई के साथ काम करने को मजबूर चिराग के पास आने-जाने का कोई साधन नहीं था।

वह काम और कॉलेज के लिए रोजाना पैदल ही सफर करता था। एसडीएम राजेश खोथ ने उसकी यह परेशानी

सुनी तो मकान की समस्या के साथ उसके संघर्ष को भी समझा और तत्काल उसकी मदद का फैसला

लिया।

चिराग दूरस्थ माध्यम से पढ़ाई कर रहा है। पिता

की बीमारी के चलते परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के लिए उसे पढ़ाई के साथ

काम करना पड़ता है। काम और कॉलेज तक पहुंचने के लिए पैदल चलना उसकी मजबूरी थी। एसडीएम

राजेश खोथ ने बातचीत के दौरान जब उसकी दिनचर्या और पढ़ाई के बारे में पूछा तो चिराग

ने अपनी यह परेशानी साझा की। चिराग की स्थिति जानने के बाद एसडीएम ने कहा कि

पढ़ाई और काम दोनों जारी रखने के लिए उसके पास आने-जाने का साधन होना जरूरी है। उन्होंने

अपनी ओर से चिराग को साइकिल देने की बात कही। साथ ही हांसी हेल्प ग्रुप के माध्यम से

भी उसकी मदद करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बीडीपीओ अशोक मेहरा को भी चिराग की सहायता

के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके बाद एसडीएम ने साइकिल निर्माता कमलेश गर्ग

से संपर्क किया और उसी समय साइकिल मंगवाकर चिराग को भेंट कर दी। साइकिल हाथ में आते

ही चिराग भावुक हो गया। उसने एसडीएम के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। एसडीएम ने भी उसे आगे

मन लगाकर पढ़ाई करने और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। चिराग के लिए यह केवल साइकिल मिलने की बात नहीं

थी, बल्कि रोजाना के उस संघर्ष में सहारा था, जिसमें वह पिता की बीमारी के बीच परिवार

की जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहा था। मौके पर मौजूद

एसडीएम कार्यालय के स्टाफ और अन्य लोगों ने भी इस पहल की सराहना की।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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