शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य का ड्रॉपआउट औसत 2.47 फीसदी रहा : शिक्षा मंत्री

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चंडीगढ़, 05 मार्च (हि.स.)। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में नूंह जिले में शिक्षा ड्रॉपआउट के मुद्दे पर चर्चा हुई। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने पिछले तीन वर्षों में कक्षा 8 और 12 के बाद जिलावार ड्रॉपआउट दर, नूंह में राज्य औसत से तुलना तथा कक्षा 5 से 12 के बीच नामांकन गिरावट के कारणों का ब्योरा मांगा। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने सदन में ब्योरा रखते हुए बताया कि नूंह जिले के विद्यार्थी शिक्षा की दहलीज पर पहुंचकर वापस लौट रहे हैं। मेवात में ड्रॉपआउट राज्य से दोगुणा है। राज्य में ड्रॉपआउट का ग्राफ लगातार लुढ़क रहा है, लेकिन नूंह में यह आंकड़ा बढ़ रहा है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य का ड्रॉपआउट औसत 2.47 फीसदी रहा, जबकि नूंह में यह ग्राफ 4.76 फीसदी दर्ज किया गया। अहम पहलू यह, मौलिक शिक्षा स्तर पर नूंह का ड्रॉप आउट आंकड़ा राज्य औसत से तीन गुणा यानी 12.84 फीसदी है। वहीं, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 12वीं में ड्रॉपआउट पंचकूला जिले का सबसे ज्यादा 11.33 फीसदी रहा जबकि पांच जिलों में यह दर शून्य दर्ज की गई।

राज्य सरकार की ओर से ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए रोडमैप तैयार गया है, जिसमें एमआईएस पोर्टल पर ट्रैकिंग कारगर साबित हो रही है। यही नहीं, ड्रॉपआउट बच्चों की मैपिंग के लिए परिवार पहचान पत्र भी प्रभावी तौर पर असरदार है, पीपीपी के जरिये से छोड़ चुके बच्चों की पहचान की जा रही है। वहीं, सभी ड्रॉपआउट बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है ताकि बच्चों को दोबारा विद्यालय में दाखिला दिलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 तक तीन सालों में कक्षा-8 और कक्षा-12 के विद्यार्थियों का जिलावार ड्रॉपआउट का ब्योरा सदन पटल पर रखा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि नूंह जिले में प्राथमिक एवं वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर राज्य औसत अधिक है। प्राथमिक स्तर ड्रॉपआउट दर 2023-24 से 2025-26 तक बढ़ी है, परंतु माध्यमिक स्तर पर कमी आई है। कक्षा 5वीं एवं छठी के बीच नामांकन में कोई गिरावट नहीं आई है। कक्षा 5वीं में वर्ष 2024-25 और 2025-26 तक नामांकन 16.52 प्रतिशत बढ़ा है। इसी तरह कक्षा-12वीं भी नामांकन 33.07 फीसदी बढ़ा है।

ड्रॉपआउट कम करने के लिए सरकार के कदम

शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर घटाने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान की जा रही है। कक्षा पहली से 12वीं तक सभी छात्रों को एमआईएस पोर्टल पर ट्रैक किया जाता है। प्रवेश उत्सव अभियान के तहत शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते हैं। जनवरी में विशेष सर्वे करके स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान की जाती है और उन्हें पुन: स्कूल से जोड़ा जाता है। दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल और छात्रावास स्थापित किए गए हैं। नूह में जिन छात्राओं का स्कूल उनके घर से 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, उन्हें प्रति वर्ष 6000 रुपये की परिवहन सहायता दी जाती है। वर्तमान में 738 छात्राएं इस योजना का लाभ ले रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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