संस्थागत साइट्स पर 350 प्रतिशत तक हो सकता एफएआर
-हरियाणा की टीओडी पॉलिसी में बदलाव पर मंत्रिमंडल की बैठक में हाेगा फैसला
चंडीगढ़, 23 मार्च (हि.स.)। हरियाणा सरकार ट्रांजिट ओरंटिड डेवलेपमेंट (टीओडी) पॉलिसी में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी के तहत एफएआर (फ्लोर एरिया रेसो) में बढ़ोतरी संभव है। अभी तक टीओडी जोन में संस्थागत साइट्स के लिए 100 से 150 प्रतिशत तक एफएआर है। अब इसे बढ़ाकर 250 प्रतिशत से 350 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है। सरल भाषा में कहें तो पहले 1,000 वर्ग मीटर जमीन पर 1,500 वर्ग मीटर तक भवन बन सकता था। अब उसी जमीन पर 2,500 से 3,500 वर्ग मीटर तक भवन बनाया जा सकेगा। यह बढ़ी हुई क्षमता सिर्फ संस्थागत साइट्स पर लागू होगी।
संस्थागत साइट्स का अर्थ है - स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, ऑफिस, सरकारी संस्थान। घर, दुकान या मॉल जैसी वाणिज्यिक निर्माण गतिविधियों के लिए एफएआर बढ़ोतरी लागू नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि मेट्रो या रेलवे स्टेशन के पास अब सिर्फ संस्थानिक उपयोग वाली जगह पर ज्यादा निर्माण संभव होगा। मौजूदा भवनों में बदलाव के लिए स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी होगा। ग्राउंड कवरेज 40 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा। न्यूनतम साइट का आकार 1 एकड़ होना चाहिए।हरियाणा सरकार ने अपने विकास योजनाओं में मिक्स्ड लैंड यूज क्षेत्रों के लिए नीति में बदलाव संभव है। मिक्स्ड लैंड यूज का मतलब है कि किसी क्षेत्र में आवासीय), वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोग एक साथ हो। पहले इस नीति में स्पष्ट अनुपात नहीं होने की वजह से नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने में देरी होती थी। प्रस्तावित नई नीति में अब सटीक एफएआर (फ्लोर एरिया रेशो) और ग्राउंड कवरेज तय किए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

