छात्रवृत्ति के खाताें में गड़बड़ी मिलने पर नपेंगे स्कूल मुखिया

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शिक्षा विभाग ने वन स्कूल एप पोर्टल पर विद्यार्थियों का डाटा वेरीफाई करने के दिए निर्देश

चंडीगढ़, 08 अक्टूबर (हि.स.)। शिक्षा विभाग ने बैंक खातों की डुप्लीकेसी के जरिये छात्रवृत्ति में गड़बड़ी व वित्तीय अनियमितता पर कड़ा संज्ञान लिया है। विभाग की ओर से स्पष्ट हिदायत दी गई है कि बैंक खातों में डुप्लीकेसी मिलने पर स्कूल मुखिया के साथ खंड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

मौलिक शिक्षा निदेशक की ओर से राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सरकारी स्कूलों में वर्ष 2026-27 की त्रैमासिक छात्रवृत्ति योजना के तहत विद्यार्थियों का डाटा वन स्कूल एप पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। निदेशक की ओर से कड़े लहजे में निर्देश दिए गए हैं कि द्वितीय एवं तृतीय तिमाही के पात्र विद्यार्थियों का डाटा निर्धारित अवधि 22 अक्टूबर तक अपडेट किया जाए। साथ ही, विभाग ने डाटा अपलोड करते समय छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि में किसी भी प्रकार की डुप्लीकेसी अथवा वित्तीय अनियमितता न होने देने को लेकर अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है।

निदेशक की ओर से स्पष्ट किया गया है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए वन स्कूल एप पोर्टल का संबंधित मॉड्यूल लाइव कर दिया गया है। इसके मद्देनजर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों तथा विद्यालयों के मुखियाओं को निर्देशित किया गया है कि त्रैमासिक स्कीम के अंतर्गत द्वितीय एवं तृतीय तिमाही के पात्र विद्यार्थियों का डाटा निर्धारित एसओपी के अनुसार अपडेट कराएं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों का बैंक खाता संख्या और परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) की आईडी का सत्यापन करने के बाद ही डेटा अपडेट किया जाए। खास तौर पर ऐसे मामलों की पूरी तरह जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें दो-दो विद्यार्थियों के लिए एक ही बैंक खाता अंकित किया गया है। ऐसे सभी मामलों की दोबारा जांच कर विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग सही बैंक खाता अंकित करना सुनिश्चित करना होगा।

अधिकारियों और स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि विद्यार्थियों का डेटा अपलोड करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसी विद्यार्थी को दी जाने वाली छात्रवृत्ति/प्रोत्साहन राशि में किसी प्रकार की डुप्लीकेसी अथवा वित्तीय अनियमितता न हो।

विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि विद्यार्थियों का पूरा डाटा उनके स्तर से गलत तरीके से अपलोड किया जाता है और उसी के आधार पर निदेशालय द्वारा संबंधित पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पीएफएमएस/डीबीटी के माध्यम से राशि वितरित की जाती है, तो बाद में किसी अपात्र विद्यार्थी को छात्रवृत्ति अथवा प्रोत्साहन राशि का लाभ प्राप्त होने की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय/खंड शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित विद्यालय के मुखिया की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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