वन स्टॉप सेंटरों ने अब तक 63 हजार से ज्यादा पीडि़ताओं को दी मदद
चंडीगढ़, 26 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा में महिलाओं पर होने वाली हिंसा अब परदे में नहीं छुप रही। राज्य के 22 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) एक ऐसी सुरक्षित खिडक़ी बनकर उभरे हैं, जहां महिलाएं बिना झिझक अपनी बात कह पा रही हैं। अहम बात यह है कि सिस्टम भी तुरंत सुन रहा है।
विधानसभा में गुरुवार को पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा झज्जर विधायक गीता भुक्कल के सवाल पर कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी ने सदन में रिपोर्ट पेश की। जिसके अनुसार स्थापना से अब तक 63 हजार से अधिक महिलाएं इन केंद्रों तक पहुंच चुकी हैं।
पुलिस सहायता से लेकर काउंसलिंग और शेल्टर तक, इन केंद्रों ने महिला सुरक्षा के वास्तविक चेहरे को मजबूती दी है। टेबल किया डेटा बताता है कि सबसे ज्यादा महिलाएं फरीदाबाद (6436), गुरुग्राम (6363) और करनाल (4595) में सहायता लेने पहुंचीं।
फरीदाबाद में काउंसलिंग लेने वाली पीडि़ताओं की संख्या ही 2436 से ऊपर रही। गुरुग्राम में काउंसलिंग और साइको-सोशल सपोर्ट दोनों श्रेणियों में 4504-4504 मामलों ने गंभीर तस्वीर पेश की। करनाल में कानूनी सहायता लेने वाली महिलाओं की संख्या 3310 और शेल्टर की जरूरत पडऩे वाले केस 3950 रहे। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी दे रहे हैं कि अब महिलाएं चुप नहीं, बल्कि अपनी आवाज दर्ज करा रही हैं।
सबसे अधिक मांग काउंसलिंग और साइको-सोशल सपोर्ट की रही, जो बताता है कि महिलाएं शारीरिक ही नहीं, मानसिक और भावनात्मक आघात से भी जूझ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि कई जिलों में पुलिस सहायता से ज्यादा मनोवैज्ञानिक सपोर्ट की मांग दर्ज हुई। यह एक बड़ा सामाजिक संकेत है कि हिंसा की जड़ें कहीं और गहरी हैं।
वन स्टॉप सेंटरों तक आए बाल विवाह के मामले भी आंखें खोलने वाले हैं। करनाल इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां 38 शिकायतें पहुंची। इसके बाद हिसार में 25, जबकि गुरुग्राम और मेवात में 12-12 शिकायतें दर्ज हुईं। अंबाला में 10, कुरुक्षेत्र में 17, कैथल में 13 और रोहतक में 13 मामले सामने आए। कई जिलों में संख्या 2-6 के बीच रही, लेकिन यह स्पष्ट है कि बाल विवाह अब भी समाज में गहराई तक मौजूद है। विधानसभा में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, हर जिले में 11-11 पद स्वीकृत हैं। सेंटर एडमिनिस्ट्रेटर से लेकर एमपीडब्ल्यू तक कई प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

