फतेहाबाद : रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे युवक का पैतृक गांव में संस्कार

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फतेहाबाद : रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे युवक का पैतृक गांव में संस्कार


फतेहाबाद, 29 अप्रैल (हि.स.)। रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में मरे गए गांव कुम्हारिया निवासी युवा विजय पूनिया का बुधवार को गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। विदेश मंत्रालय से सूचना मिलने के बाद विजय के परिजन आज ही दिल्ली से शव लेकर लौटे थे। विजय गांव कुम्हारिया के दूसरे युवा है जिनकी रूस यूक्रेन युद्ध में मौत हुई है। 25 दिन पहले चार अप्रैल को इसी गांव के रहने वाले विजय के दोस्त अंकित जांगड़ा का शव घर पहुंचा था, और अब विजय की मौत की खबर ने पूरे गांव को मातम में डुबो दिया है। बता दें कि विजय और अंकित दोनों ही उच्च शिक्षा और रोजगार की तलाश में रूस गए थे, लेकिन वहां वे वर्कफोर्स के बजाय वारफ्रंट का हिस्सा बना दिए गए।

विजय जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां एजेंटों ने उसे अच्छी सैलरी और सुरक्षित नौकरी का लालच दिया, लेकिन उसे जबरन रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन के खतरनाक डोनेत्स्क मोर्चे पर भेज दिया गया। विजय की शिनाख्त के लिए करीब दो माह पहले ही परिजनों का डीएनए सैंपल मंगवाया गया था, जिससे अनहोनी की आशंका पहले ही गहरी हो गई थी। विजय के पिता का निधन पहले ही हो चुका था। परिवार ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में लोन लेकर उसे विदेश भेजा था। अब घर में केवल उसकी बुजुर्ग मां और छोटा भाई बचे हैं।

विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर गया था। वीजा एक्सटेंड नहीं हुआ, तो एक महीने बाद वापस आ गया था। फिर अक्टूबर 2024 में दोबारा गया। 6 महीने रहकर मार्च के आखिर में वापस गांव आया। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को विजय एक साल का बिजनेस वीजा लगवाकर रूस गया। परिवार ने लोन लेकर उसे विदेश भेजा था। विजय के साथ गांव का ही अंकित जांगड़ा (23) भी इसी तरह ठगी का शिकार हुआ था। अंकित फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर रूस पहुंचा था । 13 सितंबर 2025 को उनका आखिरी वाइस मैसेज आया था जिसमें उन्होंने कहा था, हमें बचा लो, हमारे पास बस एक-दो दिन बचे हैं। हमें यूक्रेन सीमा के पास सोलीडेव के जंगलों में रखा गया है और जल्द ही युद्ध के मैदान में भेज दिया जाएगा। अंकित ने यह भी खुलासा किया था कि उनके कमांडर उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे और उनके बैच के 5 युवकों की पहले ही मौत हो चुकी थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अर्जुन जग्गा

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