हिसार के गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में हेड इंजरी और ब्रेन हेल्थ रिसर्च को मिलेगी नई उड़ान
इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन के साथ हुआ ऐतिहासिक एमओयू
विद्यार्थियों को मिलेगा वास्तविक क्लीनिकल प्रशिक्षण, संयुक्त शोध और न्यूरो-रीहैबिलिटेशन
में विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर
हिसार, 29 जुलाई (हि.स.)। यहां के गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि
हासिल करते हुए इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन (आईएचआईएफ), नई दिल्ली के साथ महत्वपूर्ण
समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों
और शोधार्थियों को हेड इंजरी, ब्रेन हेल्थ, न्यूरो-रीहैबिलिटेशन तथा आधुनिक पुनर्वास
तकनीकों पर शोध करने के साथ-साथ वास्तविक क्लीनिकल वातावरण में प्रशिक्षण प्राप्त करने
का अवसर मिलेगा। एमओयू पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई तथा
इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चित्रा ने हस्ताक्षर
किए।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बुधवार काे कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की अकादमिक
उत्कृष्टता को नई दिशा देगा। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को शिक्षा,
अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि गुजविप्रौवि का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही नहीं,
बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और उद्योग व चिकित्सा संस्थानों से जोड़कर
उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना भी है।
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक
शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग की मजबूत नींव बनेगा। इसके अंतर्गत संयुक्त प्रशिक्षण
कार्यक्रम, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, विशेषज्ञ व्याख्यान तथा अनुसंधान परियोजनाओं
का संचालन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों और शोध
पद्धतियों की जानकारी मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के अधिष्ठाता प्रो. ओम प्रकाश सांगवान ने बताया कि एमओयू
के तहत तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष रूप से कार्य किया जाएगा। पहला, संयुक्त शैक्षणिक
कार्यक्रम एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षण; दूसरा, विद्यार्थियों को इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन
के पुनर्वास केंद्रों में वास्तविक रोगियों के साथ कार्य करने का अवसर; तथा तीसरा,
हेड इंजरी, ब्रेन हेल्थ और रीहैबिलिटेशन से जुड़े संयुक्त शोध एवं परियोजनाओं को बढ़ावा
देना। उन्होंने कहा कि यह सहयोग विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ
विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक पहचान को भी सशक्त करेगा।
कुलपति के तकनीकी सलाहकार एवं अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता
प्रो. विनोद छोकर ने कहा कि वर्तमान समय में बहुविषयक अनुसंधान ही भविष्य की आवश्यकता
है। यह एमओयू शिक्षा, नवाचार और समाजोपयोगी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए आयाम
स्थापित करेगा तथा विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने
में मील का पत्थर साबित होगा।
इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चित्रा ने कहा कि
यह साझेदारी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को न्यूरो-रीहैबिलिटेशन एवं मस्तिष्क स्वास्थ्य
के क्षेत्र में विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कार्य करने का अवसर देगी। इससे न केवल
उच्चस्तरीय शोध को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने
की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।
इस अवसर पर चिकित्सा विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुनील शर्मा, सह-अंतर्राष्ट्रीय
मामलों की अधिष्ठाता डॉ. प्रियंका, विभागाध्यक्ष प्रो. जसप्रीत कौर, डॉ. राम निवास
सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

