हिसार : गुणवत्तापूर्ण शोध किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान : प्रो. संजीव कुमार

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हिसार : गुणवत्तापूर्ण शोध किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान : प्रो. संजीव कुमार


गुजवि में ‘स्किल इनहांसमेंट वर्कशॉप ऑन डेटा

एनालिसिस यूजिंग स्मार्ट पीएलएस, स्टाटा, आर एंड ग्रेटल’ का समापन

हिसार, 25 मई (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान

एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस (एचएसबी) की ओर से आयोजित

पांच दिवसीय ‘स्किल इनहांसमेंट वर्कशॉप ऑन डेटा एनालिसिस यूजिंग स्मार्ट पीएलएस, स्टाटा,

आर एंड ग्रेटल’ का समापन हुआ। कार्यशाला

का उद्देश्य शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को आधुनिक डेटा विश्लेषण तकनीकों

तथा शोध पद्धतियों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

समापन समारोह में एचएसबी के निदेशक प्रो. संजीव

कुमार ने साेमवार काे अपने संबोधन में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान

होता है। इस प्रकार की कार्यशालाएं शोधार्थियों को नवीनतम तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी

माध्यम हैं। किसी भी कार्यशाला की वास्तविक सफलता प्रतिभागियों के उत्साह, जिज्ञासा

और सीखने की प्रतिबद्धता से तय होती है। उन्होंने कहा कि एचएसबी में ऐसा शैक्षणिक परिस्थितिकी

तंत्र विकसित किया जा रहा है, जहां नवीनतम ज्ञान अर्जित करना और क्षेत्र के श्रेष्ठ

विशेषज्ञों से जुड़ना संस्थान की कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

एचएसबी के डीन प्रो. विनोद कुमार बिश्नोई ने

अपने संबोधन में कहा कि शोध केवल डिग्री प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि

नए ज्ञान के सृजन और समाज की जटिल समस्याओं के समाधान का माध्यम है। उन्होंने कहा कि

आज के समय में शोधार्थियों के लिए केवल विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक

डेटा विश्लेषण तकनीकों और शोध उपकरणों की समझ भी उतनी ही आवश्यक है।

कार्यशाला के दौरान देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों

डॉ. अतुल शिवा, डॉ. पूजा खत्री, डॉ. सीपी गुप्ता, डॉ. मिकिलेश यादव, डॉ. पूजा गोयल

तथा डॉ. हिमानी गुप्ता द्वारा लगभग 40 सत्रों का आयोजन किया गया।

कार्यशाला की समन्वयक प्रो. सुनीता रानी ने कहा

कि शोध केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, उद्योग और नीति निर्माण

में सार्थक योगदान देने का अवसर है। भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने

बताया कि एचएसबी जल्द ही शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए दो और विशेष कार्यशालाओं

का आयोजन करेगा। पीएचडी समन्वयक डा. टीकाराम ने प्रतिभागियों

को आधुनिक शोध उपकरणों एवं तकनीकों में दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला

सह-संयोजक डॉ. अभिषेक पूनिया ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया

कि पांच दिनों तक चली इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक

दोनों प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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