हिसार : 17 घंटे भिगोने व सात सीटी के बाद भी नहीं गला राजमा,मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
विद्यालय ने बच्चों को नहीं परोसा भोजन, हरियाणा
एग्रो से आई खाद्य सामग्री की जांच की मांग
शिकायत में मसालों की गुणवत्ता पर भी जताई
आपत्ति
हिसार, 24 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा की मिड-डे मील
योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के बरवाला खंड के गांव बयानाखेड़ा स्थित
राजकीय विद्यालय में मिड-डे मील के लिए उपलब्ध कराए गए राजमा और मसालों की गुणवत्ता
बारे गंभीर शिकायत सामने आई है। विद्यालय प्रशासन ने हरियाणा एग्रो के माध्यम से भेजी
गई खाद्य सामग्री को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी, बरवाला को लिखित शिकायत भेजते हुए पूरे
मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार मिड-डे मील तैयार
करने के लिए राजमा को करीब 17 घंटे तक पानी में भिगोकर रखा गया। इसके बाद उसे प्रेशर
कुकर में सात सीटी तक पकाया गया, लेकिन इसके बावजूद राजमा नहीं गला और पूरी तरह सख्त
बना रहा। विद्यालय ने बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह भोजन
विद्यार्थियों को परोसने के बजाय रोक दिया।
विद्यालय के मुख्य शिक्षक जगमेंद्र ने शुक्रवार काे बताया कि
बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना विद्यालय की जिम्मेदारी है। उन्होंने
कहा कि जब खाद्य सामग्री निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं लगी तो तत्काल विभागीय
अधिकारियों को इसकी सूचना देकर जांच की मांग की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते यह
बात सामने नहीं आती तो बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था।
मामला केवल राजमा तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों
और विद्यालय प्रबंधन ने मिड-डे मील के लिए उपलब्ध कराए गए मसालों की गुणवत्ता पर भी
सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की इस पोषण योजना का उद्देश्य बच्चों
को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है, इसलिए खाद्य सामग्री की खरीद और आपूर्ति में
गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
ज्ञात रहे कि मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर
पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश के कई सरकारी विद्यालयों
ने गुड़, पीनी और अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद शिक्षा
विभाग ने कुछ खाद्य सामग्री स्थानीय स्तर पर खरीदने की अनुमति देने के साथ गुणवत्ता
सुधार के निर्देश जारी किए थे। अब बयानाखेड़ा विद्यालय की शिकायत ने एक बार फिर मिड-डे
मील व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में
शिकायत सही पाई जाती है तो यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशभर
में सरकारी स्कूलों को उपलब्ध कराई जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की समीक्षा की
आवश्यकता भी पैदा कर सकता है।
फिलहाल विद्यालय प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ
कार्रवाई, खाद्य सामग्री की प्रयोगशाला जांच तथा भविष्य में विद्यार्थियों को केवल
मानक के अनुरूप और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

