सिरसा: हाईकोर्ट के फैसले ने भर्ती व्यवस्था पर खड़े किए सवाल: सैलजा
सिरसा, 04 अक्टूबर (हि.स.)। सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़ा मामला प्रदेश की उच्च शिक्षा भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले से यह सिद्धांत स्पष्ट हुआ है कि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में स्थान बनाने योग्य है तो उसे उस अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। आरक्षण संविधान प्रदत्त सामाजिक न्याय का अधिकार है और इसे कमजोर करने का कोई प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सांसद सैलजा ने रविवार को जारी प्रेस बयान में कहा कि मामले में सामान्य श्रेणी में चयनित उम्मीदवार के 37.91 अंक थे, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के कुछ उम्मीदवार इससे अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद चयन से बाहर रहे। यह गंभीर विषय है कि योग्य युवाओं को अपनी मेहनत और मेरिट से हासिल अधिकार के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई और भर्ती प्रक्रिया में संवैधानिक प्रावधानों का सही अनुपालन सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया।
सांसद ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा मेरिट के आधार पर नियुक्ति, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, पहले से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा तथा पात्र उम्मीदवारों को नियमानुसार वरिष्ठता का लाभ देने संबंधी निर्देश महत्वपूर्ण हैं। प्रदेश सरकार को फैसले की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवार को उसके संवैधानिक अधिकार और मेरिट का लाभ प्राप्त करने के लिए अदालत न जाना पड़े। सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नौकरियों में मेरिट का सम्मान हो, आरक्षण का पूरा लाभ मिले और किसी भी योग्य युवा के साथ अन्याय न हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dinesh Chand Sharma

