हिसार : बाबा साहेब ने जीवन के हर कदम पर समाज को अमृत प्रदान किया : कृष्ण कुमार

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हिसार : बाबा साहेब ने जीवन के हर कदम पर समाज को अमृत प्रदान किया : कृष्ण कुमार


बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य

पर गोष्ठी का आयोजन

पंचनद शोध संस्थान अध्ययन केन्द्र की ओर से किया

गया कार्यक्रम

हिसार, 19 अप्रैल (हि.स.)। पंचनद शोध संस्थान

अध्ययन केन्द्र हिसार द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य

में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्र निर्माण में डॉ. भीमराव आंबेडकर का योगदान

विषय पर आयोजित की गई इस गोष्ठी में वक्ता के तौर पर विभाग कार्यवाह कृष्ण कुमार मौजूद

रहे।

वक्ता कृष्ण कुमार ने रविवार काे अपने संबोधन में कहा कि

बाबा साहेब ने जीवन के हर कदम पर विषपान करते हुए समाज को अमृत प्रदान किया। बचपन से

ही बाबा साहब को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। विद्यालय में अन्य बच्चे उनके

साथ नहीं खेलते थे, परंतु उन्होंने कभी भी इसकी शिकायत नहीं की। अपनी माता के प्रेरणा

वचनों से उन्होंने शिक्षा को अपना लक्ष्य बनाया और समाज परिवर्तन का संकल्प लिया। एक

शिक्षक द्वारा दी गई धार्मिक पुस्तक ने उनके जीवन की दिशा निर्धारित की। कृष्ण कुमार

ने बताया कि शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा मिली।

वे प्रतिदिन 16-17 घंटे अध्ययन करते थे। उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की

और 32 डिग्रियां अर्जित कर अपने आप को समाज सुधार के लिए सक्षम बनाया।

उन्होंने श्रमिकों के लिए कार्य के

घंटे 12 से घटाकर 8 घंटे करने, भविष्य निधि जैसी योजनाओं की शुरुआत, तथा रोजगार कार्यालयों

की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रमुख पुस्तकों का उल्लेख करते हुए

उन्होंने उनके वैचारिक योगदान को रेखांकित किया। बाबा साहेब ने भारत-पाक विभाजन का

विरोध किया और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा। महिलाओं के अधिकारों पर उनके योगदान

को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि बेटियों

को पैतृक संपत्ति में अधिकार दिलाने, समान कार्य के लिए समान वेतन, तथा मातृत्व अवकाश

जैसी व्यवस्थाओं की नींव रखी।

कार्यक्रम के अंत में संविधान की प्रस्तावना

का सामूहिक वाचन किया गया। गोष्ठी में अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर

पंचनद शोध संस्थान के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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