सिरसा: दिव्यांगता कमजोरी नहीं, यह विशिष्ट क्षमता का प्रतीक: पद्मश्री गुरविंदर सिंह

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सिरसा: दिव्यांगता कमजोरी नहीं, यह विशिष्ट क्षमता का प्रतीक: पद्मश्री गुरविंदर सिंह


सिरसा, 3 दिसंबर (हि.स.)। पद्मश्री गुरविंदर सिंह ने कहा कि विशेष बच्चों का आत्मविश्वास और मुस्कान हम सभी के लिए प्रेरणा है। समाज तभी विकसित कहलाता है जब वह संवेदनशील वर्ग को सम्मान देता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम सब मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहाँ हर बच्चा, चाहे वह किसी भी क्षमता का हो, सम्मान और समान अवसरों के साथ आगे बढ़ सके। विश्व दिव्यांग दिवस हमें यही सीख देता है कि सच्ची प्रगति तब होती है जब हम सभी वर्ग को साथ लेकर चलते हैं। वे बुधवार को जेसीडी विद्यापीठ सिरसा में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगता किसी प्रकार की कमजोरी नहीं, बल्कि विशिष्ट क्षमताओं का प्रतीक है और जब इन क्षमताओं को सही दिशा व अवसर मिलता है तो ये बच्चे समाज में नई मिसाल स्थापित करते हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी सत्यवान ने कहा कि दिव्यांग बच्चे विशेष क्षमताओं से सम्पन्न होते हैं। समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें समान अवसर और सम्मान मिले। जिला प्रशासन ऐसे आयोजनों को हमेशा प्रोत्साहित करता रहेगा और यह कार्यक्रम मानवीय संवेदना का श्रेष्ठ उदाहरण है। जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक डॉ. जय प्रकाश ने कि विशेष बच्चों की प्रतिभा किसी भी रूप में सामान्य बच्चों से कम नहीं है। ऐसे आयोजन न केवल उनकी छिपी हुई क्षमताओं को उजागर करते हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयां प्रदान करते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का सशक्त माध्यम बनाते हैं। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियों दी।

माता हरकी देवी महिला महाविद्यालय ओढ़ा में कल्चरल व साहित्यिक कमेटी द्वारा अन्तरराष्ट्रीय विकलांगता दिवस पर एक जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत ने विकलांगताओं पर प्रकाश डाला और कहा कि एक शिक्षक के लिए अपने विद्यार्थियों की विभिन्नताओं व उनकी विशिष्ट शैक्षिक व सांवेगिक आवश्यकताओं को समझना अति आवश्यक है। इसके अलावा नेशनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन सिरसा द्वारा भी अंतराष्ट्रीय विकलांग दिवस पर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कॉलेज प्राचार्या डॉ. पूनम मिगलानी ने इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समावेशी समाज बनाने के लिए समुदाय, परिवार और संस्थानों में सहानुभूति, सहयोग और समर्थन की भावना विकसित करना बताया। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षण अभ्यास व इंटरशिप के दौरान विद्यालयों में अलग-अलग चार्ट, पोस्टर, मॉडल, स्लोगन व भाषण के द्वारा विकलांग लोगों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनकी स्थिति के बारे में छात्रों को अवगत करवाया।

हिन्दुस्थान समाचार / Dinesh Chand Sharma

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