हिसार : जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनी प्राध्यापिका सुमन मलिक

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हिसार : जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनी प्राध्यापिका सुमन मलिक


बस में हुई एक घटना ने दी बच्चों को पढ़ाने की

प्रेरणा

हिसार, 22 मई (राजेश्वर बैनीवाल)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक

विद्यालय सरसौद में कार्यरत प्राध्यापिका सुमन मलिक गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की किरण

बनी है। वह स्कूल में पीजीटी इतिहास के पद पर कार्यरत है और विद्यार्थियों को इतिहास

के साथ-साथ भूगोल, राजनीतिक विज्ञान व हरियाणा सामान्य ज्ञान पढ़ाकर प्रतियोगिता परीक्षाओं

के लिए भी तैयारी करवा रही है।

प्राध्यापिका सुमन मलिक द्वारा विद्यार्थियों

को पढ़ाने का दायरा केवल उनके राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सरसौद तक ही सीमित नहीं

है बल्कि वे प्रत्येक दिन विद्यालय समय के बाद गांव सरसौद से गांव बालक की ओर जाने

वाली सड़क पर पड़ने वाले एक ईंट भट्टे के लगभग 30 बच्चों को भी पढ़ा रही है। इस ईंट

भट्टे पर रहने वाले ये बच्चे पढ़ने के लिए प्राध्यापिका सुमन मलिक का उत्सुकतापूर्वक

इंतजार करते हैं। शुरू शुरू में इन बच्चों को पढ़ाना प्राध्यापिका सुमन मलिक को चुनौतीपूर्ण

लगा। इन बच्चों के लिए पढ़ना लिखना बिल्कुल नई बात थी।

प्राध्यापिका सुमन मलिक ने इन बच्चों को पढ़ाने

के प्रयास में कभी कोई कमी नहीं रहने दी। धीरे-धीरे प्राध्यापिका सुमन मलिक के सब प्रयास

सफल होने लगे और यह बच्चे पढ़ाई में रुचि लेने लगे। प्राध्यापिका सुमन मलिक प्रतिदिन

इन बच्चों के लिए अपने घर से खाना बनाकर लाती है और अपने सहयोगियों की सहायता से पढ़ने

लिखने की सामग्री इन बच्चों को देती है। इस प्रकार सुमन मलिक इन बच्चों के उम्मीद की

किरण बनती जा रही है।

प्राध्यापिका सुमन मलिक को इन बच्चों को पढ़ाने

की प्रेरणा एक घटना से मिली। एक दिन इस ईंट भट्टे पर काम करने वाला एक परिवार अपनी

अज्ञानता के कारण किसी और गंतव्य स्थान पर जाने वाली बस में सवार हो गया। बस के परिचालक

ने जब उस परिवार के मुखिया को टिकट लेने के लिए कहा तो उस मुखिया ने अपने गंतव्य स्थान

की टिकट मांगी। इस बात पर परिचालक उस मुखिया को गुस्से में कुछ-कुछ कहने लगा। प्राध्यापिका

सुमन मलिक भी उस बस में सफर कर रही थी। उस परिचालक के व्यवहार ने सुमन मलिक को ईंट

भट्टे पर रहने वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उस दिन से लेकर आज तक प्राध्यापिका

सुमन मलिक उन बच्चों को पढ़ा रही है। प्राध्यापिका सुमन मलिक उमरा गांव के जयसिंह मलिक

की बेटी है और उनकी शादी गांव खेदड़ के सुभाष सहारण के साथ हुई है। सुमन का कहना है

कि उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके पति सुभाष सहारण और उनकी सखी सुनीता का अहम योगदान

है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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