हिसार में हो सकेगा बीमार श्वानों का डायलिसिस, किडनी फेलियर से पीड़ित पालतू कुत्तों को मिलेगा नया जीवन
लुवास में अत्याधुनिक डायलिसिस
सुविधा शुरू
गडवासु लुधियाना से प्रशिक्षण लेकर आई डॉक्टरों की टीम
हरियाणा समेत पड़ोसी
राज्यों के पशुपालकों को मिलेगी बड़ी राहत
हिसार, 25 जुलाई (हि.स.)। पशु चिकित्सा और आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), ने एक और नया
कीर्तिमान स्थापित किया है। लुवास के वेटरनरी क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स में किडनी की गंभीर
बीमारियों से जूझ रहे पालतू श्वानों (कुत्तों) के लिए अत्याधुनिक डायलिसिस सुविधा का
शुभारंभ किया गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व
में शुरू हुई इस पहल से अब किडनी फेलियर और गंभीर संक्रमण से पीड़ित बेजुबानों की जान
बचाना आसान हो जाएगा।
गहन जांच के बाद ही दिया जाएगा इलाज
वेटरनरी क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स के विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञान सिंह के निर्देशन
में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम इस सेवा की कमान संभाल रही है। विभागाध्यक्ष ने बताया
कि यह एक बेहद संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रिया है, इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा
संपूर्ण चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल स्क्रीनिंग) के बाद ही उपयुक्त पाए जाने वाले मरीज
पशुओं का डायलिसिस किया जाएगा।
चिकित्सकों के अनुसार, जब पशुओं की किडनी काम करना बंद या कम कर देती है, तो
शरीर में जानलेवा टॉक्सिन्स (विषैले तत्व) और फ्लूइड जमा होने लगते हैं। डायलिसिस मशीन
की सहायता से खून को फिल्टर कर इन विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है।
इससे न केवल पीड़ित पशु की हालत में त्वरित सुधार आता है, बल्कि उसके जीवन की अवधि
भी बढ़ जाती है।
इस अत्याधुनिक यूनिट को क्रियान्वित करने में यूनिट इंचार्ज डॉ. तरुण कुमार
व डॉ. नीलेश सिंधु की मुख्य भूमिका रही। लुवास की विशेषज्ञ टीम ने हाल ही में लुधियाना
के गडवासु के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह के मार्गदर्शन में डायलिसिस का
विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था। यूनिट को शुरू करने में क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स
के डॉक्टरों, पीजी स्कॉलर्स (डॉ. अरुणा, डॉ. रेमन मोर, डॉ. निखिल मुदगिल, डॉ. प्रज्वल
सिंह कोतवाल, डॉ. सुखबीर, डॉ. रत्नेश्वर व अन्य इंटर्न) तथा तकनीकी स्टाफ का सराहनीय
योगदान रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक चरण में यह सेवा श्वानों
के लिए है, लेकिन जल्द ही संसाधनों का विस्तार कर इसे अन्य पशुओं के लिए भी उपलब्ध
कराया जाएगा।
लुवास के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश खुराना ने शनिवार काे बताया
कि लुवास की यह पहल पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह सुविधा
न केवल हरियाणा, बल्कि राजस्थान, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर जैसे पड़ोसी क्षेत्रों से
आने वाले पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

