सोनीपत: अमन चैन भाईचारा बढ़े, नफरत मिटे मोहब्बत की खुशबू महके: नदवी

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सोनीपत: अमन चैन भाईचारा बढ़े, नफरत मिटे मोहब्बत की खुशबू महके: नदवी


सोनीपत: अमन चैन भाईचारा बढ़े, नफरत मिटे मोहब्बत की खुशबू महके: नदवी


सोनीपत, 21 मार्च (हि.स.)। सोनीपत

में रमजान के पवित्र माह के 30 रोजों की इबादत के बाद शनिवार को ईद-उल-फित्र पूरे उल्लास,

श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाई गई। मौलाना अरशद नदवी ने कहा कि अमन चैन भाईचारा बढ़े, नफरत मिटे

मोहब्बत की खुशबू महके। गन्नौर, बिलंदपुर खेड़ी,

सोनीपत ईदगाह सहित शहर की विभिन्न मस्जिदों में खुले आसमान के नीचे ईद की नमाज़ अदा

की गई। नमाज़ के दौरान लोगों ने अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी, देश की तरक्की, इंसानियत

की भलाई और पूरी दुनिया में अमन-चैन कायम रहने की दुआ की।

नमाज़

के बाद सभी लोग एक-दूसरे से गले मिले और ईद की मुबारकबाद दी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों

में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने नए कपड़े पहनकर खुशी जाहिर की, वहीं घरों

में सेवइयां, शीर खुरमा और विभिन्न पकवान बनाकर एक-दूसरे के साथ साझा किए गए। पूरे

क्षेत्र में उत्सव और सौहार्द का माहौल बना रहा।

मदरसा

शमसुल उलूम के संचालक मौलाना मोहम्मद अरशद नदवी ने कहा कि रमजान का महीना आत्मशुद्धि,

सब्र और दूसरों की पीड़ा को समझने का संदेश देता है। रोज़ेदारों ने पूरे महीने इबादत,

कुरान की तिलावत और जिक्र के माध्यम से खुद को आध्यात्मिक रूप से मजबूत किया। ईद का

दिन अल्लाह की ओर से इनाम का दिन होता है, जिसमें हर कोई खुशियां बांटता है। उन्होंने

कहा कि समाज में शिक्षा का प्रसार बहुत जरूरी है, ताकि हर बच्चा आगे बढ़ सके, चाहे

वह किसी भी मजहब या वर्ग से क्यों न हो। उनका संदेश रहा कि नफरत को खत्म कर इंसानियत

और प्रेम को बढ़ावा देना ही सच्चा रास्ता है।

गन्नौर

की इदगाह में भी बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज़ अदा की। मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद

इमरान ने कहा कि गन्नौर ऐसा शहर है, जहां सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर प्रेम और भाईचारे

के साथ रहते हैं। ईद का संदेश यही है कि हम सभी एक-दूसरे के साथ मिलकर रहें और समाज

में प्रेम तथा सद्भाव को बढ़ावा दें। रोज़े केवल अल्लाह की इबादत के लिए रखे जाते हैं,

जो हमें संयम, त्याग और सेवा का भाव सिखाते हैं। अंतरराष्ट्रीय

ताइक्वांडो खिलाड़ी और कोच यामिन खान ने कहा कि हिंदुस्तान की मिट्टी हमें एकता और

भाईचारे का पाठ पढ़ाती है। खेल हो या जीवन, सबसे बड़ा धर्म इंसानियत ही है। उन्होंने

कहा कि हमें एक परिवार की तरह रहना चाहिए और समाज में आपसी प्रेम बनाए रखना चाहिए।

बुजुर्गों ने दुआ की कि देश में अमन कायम हो, झगड़े खत्म हों, भाईचारा बढ़े और देश

आगे बढ़े। नौजवानों जैसे मोहम्मद वसील ने कहा कि ईद खुशी का दिन है, अल्लाह से माफी

और सबकी मफिरत की दुआ है। सभी ने हंसते-मुस्कुराते चेहरों से उत्सव मनाया, प्यार-मोहब्बत

से रहने की बात कही।

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हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना

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