हिसार : भारत ज्ञान की प्राचीन परंपरा वाला देश: प्रो. नरसी राम बिश्नोई

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हिसार : भारत ज्ञान की प्राचीन परंपरा वाला देश: प्रो. नरसी राम बिश्नोई


गुरु जम्भेश्वर

विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

हिसार, 24 फरवरी

(हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी

राम बिश्नोई ने कहा है कि भारत ज्ञान की प्राचीन परंपरा वाला देश है। भारत ने ही दुनिया

को गणित, धातु कर्म, आयुर्वेद कृषि विज्ञान, वस्त्र तकनीक और दर्शन जैसे अनगिनत क्षेत्रों

में विश्व का मार्गदर्शन किया है।

कुलपति प्रो. नरसी

राम बिश्नाई मंगलवार को विश्वविद्यालय के पेटेंट सेल के सौजन्य से ‘आईपीआर अवेयरनेस,

ड्राफ्टिंग एंड फाइलिंग’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित

कर रहे थे। उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रायोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता पेटेंट

सेल के निदेशक प्रो. अश्वनी कुमार ने की। विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर सिंह सभागार

में हुई कार्यशाला के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली की अनुसंधान परिषद के

संयुक्त डीन डा. अश्वनी सिवाल व पेटेंट सूचना केंद्र, पंचकूला के वैज्ञानिक डा. राहुल

तनेजा रहे। पेटेंट सेल की उप निदेशिका प्रो. मीनाक्षी भाटिया मंच पर उपस्थित रही।

कुलपति प्रो. नरसी

राम बिश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में एक समय ऐसा आया जब हमने ज्ञान की विधिक

सुरक्षा पर सही से ध्यान नहीं दिया। इसी उदासीनता के कारण कई बार हमारी पारंपरिक जानकारी

और संसाधनों पर बाहरी संस्थाओं ने अधिकार जताने का प्रयास किया। हल्दी तथा बासमती चावल

जैसे भारतीय उत्पादों पर भी विदेशी पेटेंट हो गए थे, जिन्हें भारत ने कानूनी लड़ाई के

माध्यम से निरस्त करवाया।

कुलपति प्रो. नरसी

राम बिश्नोई ने कहा कि आज का भारत जागरूक भारत है। हम शोध तथा पेटेंट फाइलिंग को बढ़ावा

दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी होगी

तथा विश्वविद्यालय में पेटेंट फाइलिंग को लेकर जागृति पैदा करेगी। उन्होंने युवा शोधार्थियों

से कहा कि वे केवल अविष्कारक ही न बनें, बल्कि प्रशिक्षित पेटेंट प्रोफेशनल भी बनें।

मुख्य वक्ता डा.

अश्वनी सिवाल ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) तथा पेटेंट

के बारे में हर संस्थान में आवश्यक रूप से जागरूकता सेल होनी चाहिएं। हमें भारत में

आईपीआर इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने आईपीआर और पेटेंट की प्रक्रिया तथा कानूनी

पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही बताया कि किन-किन क्षेत्रों में पेटेंट

फाइल किए जा सकते हैं।

दूसरे तकनीकी सत्र

में मुख्य वक्ता डा. राहुल तनेजा ने बताया कि भारत में 2025 में पहली बार एक लाख से

ज्यादा पेटेंट फाइल हुए हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक भारतीय आवेदक हैं। भारत सरकार व राज्य सरकार के पेटेंट जागरूकता कार्यक्रमों

से जागरूगता बढ़ रही है, जिससे पेटेंट फाइल करने का अनुपात बढ़ रहा है। सरकार लोगों को

स्टार्ट-अप, पेटेंट फाइलिंग तथा उद्यमीयता के लिए प्रेरित करने के बेहतर परिणाम आ रहे

हैं।

निदेशक प्रो. अश्वनी

कुमार ने अपने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा कहा

कि वर्तमान समय में केवल ज्ञान हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आइडियाज का उत्पादन

व वाणिज्यीकरण भी आवश्यक है। उन्होंने पेटेंट सेल की गतिविधियों के बारे में भी विस्तार

से जानकारी दी। उप निदेशिका डा. मीनाक्षी भाटिया ने धन्यवाद संबोधन किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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