नारनाैल में अंबेडकर डिजिटल लाइब्रेरी का नाम बदलने पर दलितों में रोष, साैंपा ज्ञापन
विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर निर्णय वापस लेने की मांग की
नारनाैल, 19 जून (हि.स.)। हरियाणा सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में स्थापित डॉ. भीमराव अंबेडकर डिजिटल/ई-लाइब्रेरी का नाम बदलकर ‘अटल पुस्तकालय’ किए जाने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में शुक्रवार को नारनौल में अनुसूचित और पिछड़े समाज के लोगों ने सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति के नेतृत्व में रोष व्यक्त करते हुए उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
समिति के प्रधान चंदन सिंह जालवान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके बाद एसडीएम अनिरुद्ध यादव को ज्ञापन सौंपकर सरकार से निर्णय वापस लेने और पुस्तकालयों का मूल नाम बहाल करने की मांग की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष लालाराम नाहर तथा समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था, दिल्ली के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक वर्ग विशेष के नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रेरणास्रोत और भारतीय संविधान के निर्माता हैं। उनके नाम पर स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी का नाम बदलना उनके योगदान का अनादर है।
परिवर्तनकारी साहित्य मंच के प्रधान एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. शिवताज सिंह तथा मानव समाज सेवा फाउंडेशन के प्रधान जयपाल सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही अपना फैसला वापस नहीं लिया तो समाज को व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
बैठक में अचीवर्स फाउंडेशन के अमर सिंह निम्होरिया, महर्षि वाल्मीकि सभा के राजेश चांवरिया, कोली समाज के प्रधान तोताराम, भारतीय सामाजिक परिवर्तन संघ के सुमेर सिंह गोठवाल, हरियाणा प्रदेश चमार महासभा के जिलाध्यक्ष अनिल फाण्डन, गुरु रविदास महासभा के सदस्य प्यारेलाल चवन, समाजसेवी मदनलाल डाडैया और धानक समाज के महेंद्र खन्ना सहित अनेक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सरकार से नाम परिवर्तन का निर्णय वापस लेने की मांग की।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला

