नारनौल में अनोखी पहलः अध्यापक ने बेटी को घोड़ी पर बिठाकर निकाला ‘बनवारा’

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नारनौल में अनोखी पहलः अध्यापक ने बेटी को घोड़ी पर बिठाकर निकाला ‘बनवारा’


नारनौल में अनोखी पहलः अध्यापक ने बेटी को घोड़ी पर बिठाकर निकाला ‘बनवारा’


सरकारी अध्यापक जुगजीत ने तोड़ी परंपरा, बेटी-बेटे में समानता का दिया संदेश

नारनाैल, 20 अप्रैल (हि.स.)। महेंद्रगढ़ जिले के गांव धौलेड़ा में एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जहां सरकारी अध्यापक जुगजीत ने अपनी बेटी प्रियंका की शादी में परंपराओं से हटकर उसे घोड़ी पर बैठाकर बनवारा निकाला। आमतौर पर यह रस्म बेटों के लिए ही निभाई जाती है, लेकिन जुगजीत ने इस सोच को बदलते हुए समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।

रविवार रात को शादी से एक दिन पूर्व प्रियंका को घोड़ी पर बैठाकर पूरे गांव में बनवारा निकाला गया। इस दौरान गांव का माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए और नाच-गाकर खुशियां मनाईं। बनवारे से पहले सहभोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

प्रियंका की शादी महेंद्रगढ़ के पड़तल भोजावास निवासी मनीष के साथ होने जा रही है, जो पंचकूला में कृषि विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर ऐसी रस्में केवल बेटों के लिए होती हैं, लेकिन जुगजीत ने यह साबित कर दिया कि बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं। गांव में जब प्रियंका घोड़ी पर सवार होकर निकलीं, तो यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। कई लोगों ने इसे समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताया।

जुगजीत ने कहा कि उन्होंने कभी भी बेटे और बेटी में भेदभाव नहीं किया। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। बेटा दिल्ली पुलिस में कार्यरत है, जबकि प्रियंका भी सरकारी नौकरी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हर पिता का सपना होता है कि वह अपनी बेटी की हर इच्छा पूरी करे और उसे आगे बढ़ने का पूरा अवसर दे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला

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