कैथल: जहरमुक्त भोजन के लिए प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान : आचार्य देवव्रत

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कैथल: जहरमुक्त भोजन के लिए प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान : आचार्य देवव्रत


कैथल, 27 अक्टूबर (हि.स.)। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से खेती की लागत बढ़ रही है और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। यदि जहरमुक्त भोजन चाहिए तो किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने होंगे। इससे जमीन की उर्वरता बचाने के साथ खेती की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी। राज्यपाल आचार्य देवव्रत मंगलवार को कैथल जिले के गांव गोविंदपुरा में प्राकृतिक खेती पर आयोजित कार्यक्रम और शहीद उधम सिंह चौक के शिलान्यास समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में पहुंचने पर शहीद उधम सिंह इंटरनेशनल फाउंडेशन के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गांव में शहीद उधम सिंह चौक का शिलान्यास किया। आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसान अपनी मेहनत से मिट्टी में सोना उगाता है, लेकिन खेती में रासायनिक खादों का अत्यधिक इस्तेमाल होने से जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों को प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद किसान मेहनत और लगन से खेती कर रहे हैं। उन्होंने सीवन क्षेत्र के किसानों द्वारा सब्जी उत्पादन की ओर कदम बढ़ाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि खेतों में मित्र कीट के रूप में पहचाने जाने वाले केंचुए मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक इस्तेमाल से इनकी संख्या प्रभावित हो रही है। किसानों को जमीन की सेहत सुधारने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। उन्होंने कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां करीब 200 एकड़ में प्राकृतिक खेती की जा रही है। किसानों को वहां प्रशिक्षण लेकर इस पद्धति को अपने खेतों में लागू करना चाहिए।

देसी गाय के गोबर और मूत्र से तैयार करें खादराज्यपाल ने प्राकृतिक खाद तैयार करने की विधि बताते हुए कहा कि देसी गाय के गोबर और मूत्र के साथ गुड़, दाल के बेसन तथा पेड़ के नीचे की मिट्टी को ड्रम में मिलाकर छह दिन तक रखा जाता है। उनके अनुसार, देसी गाय के गोबर में बड़ी संख्या में सूक्ष्मजीव होते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने एक वीडियो के माध्यम से रासायनिक पदार्थों के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी।

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

Livevns.news Desk
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