विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में प्रस्ताव पास
चंडीगढ़, 27 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक गिरने के बाद हरियाणा सरकार द्वारा सोमवार को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र का भी कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में सरकारी प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हुआ। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कोई भी क्षेत्र या समाज तब तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं माना जा सकता, जब तक उसकी आधी आबादी माताओं और बहनों को सम्मान, समान अवसर और अधिकार नहीं मिलते। इसलिए ‘नारी सम्मान’ भारत की चिर-नूतन सभ्यता और संस्कृति की अटूट पहचान भी है तथा विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प का मूल आधार भी है।
कांग्रेस विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी में विधानसभा परिसर की पार्किंग में समानांतर विधानसभा चलाई। कांग्रेस में क्रास वोटिंग के पांच आरोपी विधायकों में से तीन रेणु बाला, शैली चौधरी तथा जरनैल सिंह ने सदन में उपस्थिति तो दर्ज करवाई लेकिन तो कार्यवाही में शामिल हुए और न ही कांग्रेस की समानांतर विधानसभा का हिस्सा बने।
इनेलो के दोनों विधायक अर्जुन चौटाला व आदित्य देवीलाल भाजपा सरकार द्वारा बुलाई गए विशेष सत्र में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने नये परिसीमन के हिसाब से लाए जा रहे महिला आरक्षण बिल का विरोध किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा की पार्किंग में कांग्रेस द्वारा चलाई गई समानांतर विधानसभा पर चुटकी लेते हुए कहा कि जिन वाहनों के टायर पंचर हो जाते हैं, उन्हें अक्सर पार्किंग में ही देखा जा सकता है। कांग्रेस द्वारा चलाई गई समानांतर विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हम महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के विरुद्ध नहीं है। कांग्रेस चाहती है कि महिलाओं को राजनीति में प्रोत्साहन मिले।
कांग्रेस की समानांतर विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर साल 2023 का आरक्षण बिल लागू करने की मांग की गई। बेरी के कांग्रेस विधायक डा. रघुबीर कादियान ने समानांतर विधानसभा में स्पीकर की भूमिका निभाई। करीब डेढ़ घंटे तक चली समानांतर विधानसभा की कार्यवाही में विधायक अशोक अरोड़ा, गीता भुक्कल, आफताब अहमद, निर्मल सिंह, बीबी बत्रा, रामकरण काला, नरेश सेलवाल, चंद्रप्रकाश, चंद्रमोहन बिश्नोई, कुलदीप वत्स और इंजीनियर मामन खान ने साल 2023 के महिला आरक्षण बिल के समर्थन में अपनी बात रखी। अशोक अरोड़ा और गीता भुक्कल ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना समय की जरूरत है, लेकिन उनके कंधे पर राजनीति की बंदूक रखकर वोटों की रोटियां किसी को नहीं सेंकने दी जाएंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

