हरियाणा में बनेगा अल्पसंख्यक आयोग
-महिला आयोग में बढ़ेगी सदस्यों की संख्या
-सरकार ने विधानसभा में पेश किए बिल
चंडीगढ़, 31 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा में बहुत जल्द अल्पसंख्यक आयोग का गठन होगा। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सरकार ने विधानसभा में हरियाणा राजय अल्प संख्यक आयोग विधेयक-2026 पेश किया गया। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा करने, संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी करने और राज्य में उनके सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक वैधानिक हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना करना है। आयोग में सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष, पांच गैर-सरकारी सदस्य और एक सचिव शामिल होंगे। अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा, जिसमें इस्तीफे, हटाने और रिक्तियों को भरने से संबंधित प्रावधान कानून में शामिल किए गए हैं। आयोग अल्पसंख्यक समुदायों को उपलब्ध संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की जांच करेगा और उनके प्रभावी प्रवर्तन के लिए उपायों की सिफारिश करेगा। यह अल्पसंख्यकों से संबंधित सरकारी नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की निगरानी करेगा, अध्ययन और अनुसंधान करेगा, सरकारी सेवाओं में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का आकलन करेगा, उनके कल्याण और विकास के लिए उपायों की सिफारिश करेगा, और राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देगा।आयोग अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित करने संबंधी शिकायतों की भी जांच करेगा और ऐसे मामलों को उपयुक्त अधिकारियों के समक्ष उठाएगा। हरियाणा महिला आयोग में अब महिला सदस्यों की संख्या भी बढ़ेगी। हरियाणा विधानसभा में सोमवार को हरियाणा राज्य महिला आयोग संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। आयोग में सदस्यों की संख्या 5 से बढक़र अब 7 हो जाएगी। इसके लिए सरकार ने हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश से संबंधित अधिसूचना जारी की है। सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम 2012 की धारा 3(2)(बी) में बदलाव किया गया है। सदस्यों की संख्या बढऩे से आयोग में विभिन्न वर्गों व क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। साथ ही महिलाओं की शिकायतों, अधिकारों और कल्याण से जुड़े मामलों की सुनवाई भी तेज हो सकेगी।
सरकार के मुताबिक राज्य महिला आयोग में बदलाव की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। आयोग के पास घरेलू हिंसा, यौन उत्पीडऩ, साइबर अपराध और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। कानूनी जागरूकता बढऩे, आयोग तक पहुंच आसान होने और लोगों के भरोसे में इजाफा होने से अधिक महिलाएं अपनी शिकायतें दर्ज करा रही हैं। सरकार का मानना है कि मौजूदा पांच गैर-सरकारी सदस्यों वाली व्यवस्था बढ़ते कार्यभार के लिए पर्याप्त नहीं रह गई थी। शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में कठिनाई आ रही थी। इसी कारण आयोग में सदस्यों की अधिकतम संख्या पांच से बढ़ाकर सात करने का फैसला लिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

