हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में ‘मिशन होश-नशा मुक्ति एवं रोकथाम अभियान’ का आयोजन
काार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को दिया नशामुक्त
जीवन का संदेश
हिसार, 10 अप्रैल (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान
एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र, राष्ट्रीय सेवा
योजना (एनएसएस) एवं आईएमए महिला चिकित्सा विंग, हिसार के संयुक्त तत्वावधान में सीआरएस
ऑडिटोरियम में ‘मिशन होश-नशा मुक्ति एवं रोकथाम अभियान’ विषयक जागरूकता कार्यक्रम
का आयोजन किया गया। शुक्रवार काे हुए कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति
जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ, सकारात्मक और अनुशासित जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित
करना था।
पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता कार्यक्रम में मुख्यातिथि
रहे जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की। डॉ. अजय
महाजन विशिष्ट अतिथि जबकि डॉ. बीर सिंह कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय
की प्रथम महिला डॉ. वंदना बिश्नोई व कुलसचिव डॉ. विजय कुमार सहित चिकित्सक प्रकोष्ठ
की सम्मानित चिकित्सकगण डॉ. अनीशा महाजन, डॉ. मीनाक्षी बंसल, डॉ. संगीता गिरधर, डॉ.
अर्चना सोनी, शिक्षाविद्, चिकित्सक, अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि डॉ.
कमल गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में नशा युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनता
जा रहा है। यदि युवाओं को सही समय पर जागरूक किया जाए और उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान
की जाए तो वे न केवल स्वयं को नशे से दूर रख सकते हैं बल्कि समाज में भी नशामुक्ति
का संदेश फैला सकते हैं। मनुष्य का जीवन अमूल्य है, इसे नशे के माध्यम से बर्बाद नहीं
करना चाहिए।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नरसी
राम बिश्नोई ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक
जागरूकता और नैतिक मूल्यों के निर्माण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि
नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और ऐसे अभियान
विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं। नशा मुक्त युवा ही
विकसित राष्ट्र की आधारशिला है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अजय महाजन ने कहा कि नशा केवल
व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित करने के साथ ही यह परिवार और समाज की संरचना को
भी कमजोर करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए
आत्मसंयम और जागरूकता को नशामुक्त जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
मुख्य वक्ता डॉ. बीर सिंह ने नशे के मनोवैज्ञानिक
और सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए
परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि इस
प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाते हैं।
विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र की वरिष्ठ चिकित्सा
अधिकारी डॉ. सरीना हसीजा ने नशा मुक्त समाज में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका एवं जागरूकता
की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत किए।
एनएसएस की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजू गुप्ता
ने स्वागत संभाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत
किया तथा नशा मुक्ति के लिए समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर समाज सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र
में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हिसार की महिला चिकित्सकों डॉ. सत्या सावंत, डॉ. रंजू
पोपली, डॉ. रितु चौपड़ा, डॉ. सरिता कालड़ा और डॉ. मनीषा मेहता को विश्वविद्यालय द्वारा
सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की गूंज क्लब व झंकार क्लब के सदस्यों द्वारा सांस्कृतिक
प्रस्तुतियां दी गई तथा नृत्यम अकादमी के सदस्यों द्वारा ‘पापा कैच’ प्ले प्रस्तुत किया
गया।
कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की
निदेशक डॉ. तरुणा एवं उनकी टीम द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय स्वास्थ्य
केन्द्र के समस्त चिकित्सकों सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता,
निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर-शैक्षणिक कर्मचारी एवं एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी
डॉ. सुनीता रानी, डॉ. विनीता, डॉ. रामस्वरूप, डॉ. शिवानी यादव, डॉ. सुमित शर्मा, डॉ.
खुशबू सेठी, डॉ. समृद्धि, डॉ. ज्योति सहित स्वयंसेवक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी
उपस्थित रहे। एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विकास जांगड़ा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों
और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

