हरियाणा: सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी इको-सेंसिटिव ज़ोन के लिए मास्टर प्लान मंजूर

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चंडीगढ़, 30 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी इको-सेंसिटिव ज़ोन (ईएसजेड) के लिए ज़ोनल मास्टर प्लान नोटिफ़ाई कर दिया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सैंक्चुअरी की सीमा के आसपास 24.61 सक्वेयर किलोमीटर के बफऱ में क्या रेगुलेट किया जा सकता है, क्या नहीं, और क्या किया जाना चाहिए। यह 10 गांवों और पंचकूला शहर के कुछ हिस्सों को छूता है।

राज्य के पर्यावरण, वन और वाइल्डलाइफ़ डिपार्टमेंट द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। मास्टर प्लान ने सैंक्चुअरी के कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह के नए कंस्ट्रक्शन पर रोक लगा दी है, जिसमें कमर्शियल होटल और रिज़ॉर्ट शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों को अपनी रहने की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, बिल्डिंग बायलॉज़ के अनुसार,अपनी ज़मीन पर असली रहने के इस्तेमाल के लिए कंस्ट्रक्शन करने की इजाज़त होगी।

इकोलॉजिकल इंटीग्रिटी बनाए रखने के लिए ईएसजेड के अंदर हाई-राइज़ ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी या दूसरे बड़े हाई-राइज़ स्ट्रक्चर की इजाज़त नहीं होगी।

अधिसूचना के अनुसार सभी मौजूदा अप्रूव्ड डेवलपमेंट प्लान बिना किसी रुकावट के रहेंगे, और पंचकूला शहर में मनसा देवी कॉम्प्लेक्स के पहले से अप्रूव्ड प्लानिंग फ्रेमवर्क का सख्ती से पालन किया जाएगा। मंज़ूर प्लान से कोई भी ऐसा बदलाव जो ईएसजेड नोटिफिकेशन से अलग हो, उसकी इजाज़त नहीं होगी। एमडीसी के अप्रूव्ड लेआउट एरिया का कुल 194.9 एकड़ और इसके डेवलपमेंट प्लान एरिया का 283 एकड़ हिस्सा एक किलोमीटर के ईएसजेड बफर में आता है।

कमर्शियल माइनिंग, पत्थर की खदान, पत्थर क्रशिंग यूनिट, नई आरा मिलें और प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर रोक है। ईएसजेड में ग्राउंडवाटर समेत प्राकृतिक पानी के सोर्स का कमर्शियल इस्तेमाल मना होगा। पानी को खराब होने या प्रदूषण से बचाने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे।

फर्मों, कॉर्पोरेशन और कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर कमर्शियल पशुधन और पोल्ट्री फार्म बनाने पर भी रोक है। ईएसजेड एरिया में जंगल की ज़मीन, सरकारी या रेवेन्यू या प्राइवेट ज़मीन पर प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स की पहले से इजाज़त के बिना पेड़ नहीं काटे जा सकेंगे। इसके बजाय, नई टूरिज्म और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी को ज़ोनल प्लान और टूरिज्म मास्टर प्लान के हिसाब से होना चाहिए।

मास्टर प्लान लोकल कम्युनिटी द्वारा इको-फ्रेंडली खेती, बागवानी, डेयरी और मछली पालन को बढ़ावा देता है, साथ ही रेनवाटर हार्वेस्टिंग, रिन्यूएबल एनर्जी अपनाना, ऑर्गेनिक खेती, एग्रोफॉरेस्ट्री और गांव के कारीगरों द्वारा चलाए जाने वाले कॉटेज इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देता है।

ईएसजेड में मास्टर प्लान के नियमों के किसी भी उल्लंघन पर नजऱ रखने और उसका संज्ञान लेने की मुख्य जिम्मेदारी सक्षम डिस्ट्रिक्ट-लेवल अथॉरिटी की होगी, जबकि इसे पूरी तरह लागू करने और मॉनिटर करने की ज़िम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट मॉनिटरिंग कमेटी की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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