ब्रेड डेड युवक के अंगदान से कई मरीजों को मिली नई जिंदगी

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ब्रेड डेड युवक के अंगदान से कई मरीजों को मिली नई जिंदगी


मात्र 45 मिनट में पहुंचाया हार्ट, लिवर लेकर पीजीआई से सेना चंडीगढ

रोहतक से दिल्ली और चंडीगढ़ तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

रोहतक, 16 मई (हि.स.)। पीजीआईएमएस रोहतक से एक बार फिर मानवता की मिसाल सामने आई है। भिवानी जिले के 28 वर्षीय युवक को चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया है। गहरे सदमे के बीच परिजनों ने युवक के अंगदान किये। लीवर, हार्ट, किडनी, कॉर्निया इत्यादि समेत कई अंग जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी देंगे। अंगदानों को अन्य अस्पतालों तक पहंुचाने के लिए सेना की मद्द ली गई और रोहतक से दिल्ली और चंडीगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

शनिवार सुबह सेना की एक टीम विशाल का लिवर लेकर दिल्ली के आर आर अस्पताल पहुंची और दूसरी टीम चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई। बाद में आर्मी की टीम किडनी को चंडीगढ के पास स्थित चंडी मंदिर आर्मी अस्पताल एयरलिफ्ट करके ले गई। बताया जा रहा है कि भिवानी निवासी विशाल को 13 मई को गंभीर सड़क हादसे के बाद परिजन पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में लाए थे। सिर में गंभीर चोट के कारण डॉक्टरों के अथक जीवनरक्षक प्रयासों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल के नेतृत्व में एनेस्थीसिया से डॉ तरुण यादव,न्यूरो सर्जरी से डॉ वरुण अग्रवाल और सर्जरी विभाग के डॉ सुरेंद्र वर्मा के बोर्ड ने दो बार एपनिया टेस्ट समेत निर्धारित प्रोटोकॉल पूरे कर उसे ब्रेन डेड घोषित किया। ब्रेन डेड की सूचना मिलते ही सोटो हरियाणा की काउंसलिंग टीम परिजनों से मिली, शुरुआती दौर में परिवार इस निर्णय के लिए तैयार नहीं था। अपने जवान बेटे को खोने का गम इतना गहरा था कि वे कुछ भी सुनने-समझने की स्थिति में नहीं थे। सूचना मिलते ही कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल परिवार से मिलने स्वयं ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और परिजनों से बात की ओर उन्हें इस नेक कार्य के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। सबसे बड़े दुख में भी अगर हम किसी की जिंदगी बचा सकें तो इससे बड़ा पुण्य नहीं।

डॉ. अग्रवाल ने करीब एक घंटे तक परिवार के साथ समय बिताया। उन्होंने अंगदान की पूरी प्रक्रिया, कानूनी पहलुओं और धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताया। आखिरकार परिजनों ने भारी मन से, लेकिन दृढ़ निश्चय के साथ अंगदान के फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दिए। नियमों के आधार पर अंगों का आवंटन होगा, पीजीआईएमएस में भी किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची के मरीज हैं। कॉर्निया यहां के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को दी जाएगी। शनिवार सुबह 6 बजे से रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जिसके चलते रोहतक से दिल्ली और चंडीगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और 45 मिनट में ही हार्ट दिल्ली पहुंचाया गया। डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि प्रदेश में अंगदान की क्रांति आई है, दो साल पहले तक हमारे यहां लोग अंगदान का नाम सुनकर ही डर जाते थे, आज स्थिति यह है कि ब्रेन डेड के अधिकतर मामलों में परिवार थोड़ी काउंसलिंग के बाद ही सहमति प्रदान कर रहे हैं। यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे कुलपति डॉ अग्रवाल का विजन और सोटो हरियाणा की टीम की मेहनत है। नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह के नेतृत्व में सोटो हरियाणा बेहतरीन कार्य कर रहा है। पारदर्शिता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि आमजन में सबसे बड़ा भ्रम ब्रेन डेड को लेकर है। लोग इसे कोमा समझ लेते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि ब्रेन डेड मृत्यु की कानूनी और चिकित्सकीय रूप से पुष्टि है। इसमें ब्रेन स्टेम डेथ होती है। वेंटिलेटर पर सिर्फ दिल कुछ घंटे या दिन धड़कता है, क्योंकि उसे मशीन से ऑक्सीजन मिल रही है। मशीन हटाते ही दिल की धड़कन रुक जाती है। ऐसे में अंगदान ही एकमात्र विकल्प है जिससे उस व्यक्ति की मृत्यु को सार्थक बनाया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल

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