हिसार : कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होती : स्वामी ज्ञानानंद

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हिसार : कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होती : स्वामी ज्ञानानंद


आगामी सत्र से एनईपी-2020 के तहत इंटीग्रेटेड

बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स आरंभ करेगा : प्रो. नरसी राम बिश्नोई

गुजविप्रौवि में ‘सक्षम युवा, समर्थ भारत: गीता

का दिव्य मार्गदर्शन’ विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित

हिसार, 09 अप्रैल (हि.स.)। गीता मनीषी स्वामी

ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा है कि कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होती। स्वयं

को स्वयं से उठाओ, रास्ते बहुत हैं, आकाश खुला है। गीता जीवन के इसी संदेश के साथ क्षमताओं

का विकास करती है और व्यक्ति को अंदर से सक्षम बनाती है।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज गुरुवार काे गुरु

जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सौजन्य से ‘सक्षम युवा, समर्थ

भारत: गीता का दिव्य मार्गदर्शन’ विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम को मुख्य वक्ता एवं मुख्यातिथि के तौर

पर संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय के जेसी बोस सेमिनार हॉल नं. 1 में हुए इस कार्यक्रम

की अध्यक्षता कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की। इस अवसर पर गुरु जम्भेश्वर जी महाराज

धार्मिक अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. किशना राम बिश्नोई तथा विश्वविद्यालय की प्रथम

महिला डा. वंदना बिश्नोई भी उपस्थित रहे।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा

कि भारत में क्षमताओं की कमी नहीं है। मानव, खनिज, बौद्धिक, भौतिक तथा आर्थिक संसाधन

सभी दृष्टि से भारत अग्रणी है। आवश्यकता केवल यह है कि भारत का युवा संकल्पित हो, खुद

को सक्षम बनाए। न केवल सक्षम बनाए बल्कि स्वामी विवेकानंद और अर्जुन जैसे आदर्शों को

समक्ष रखते हुए वैसा ही बनने का प्रयास करें। निश्चित रूप से भारत वर्ष 2047 तक न केवल

आर्थिक विकास की दृष्टि से बल्कि पारंपरिक, सैद्धांतिक, चारित्रिक तथा विश्व बंधुत्व

की दृष्टि से भी विकसित होकर नई गाथा लिखेगा।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने भारत

के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और खिलाड़ी मनुभाकर का उदाहरण देते हुए बताया

कि किस प्रकार इन्होंने गीता के आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन की श्रेष्ठ सफलताओं को

हासिल किया। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे एकाग्र होकर आत्मविश्वास से चारित्रिक मूल्यों

के साथ आगे बढ़ें। निश्चित तौर पर उन्हें श्रेष्ठ सफलताएं मिलेंगी।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने अपने संबोधन

में कहा कि गुजविप्रौवि आगामी सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के

तहत गीता ज्ञान संस्थान कुरूक्षेत्र के संयुक्त तत्वाधान में इंटीग्रेटेड बीए-एमए भगवद्गीता

कोर्स आरंभ करेगा। यह कोर्स नवाचार के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण

भूमिका निभाएगा। यह कोर्स विशेष एमओयू के तहत संचालित होगा। गुरु जम्भेश्वर जी महाराज

धार्मिक अध्ययन संस्थान व जीओ गीता के संयुक्त तत्वाधान में पूर्व में भगवद्गीता डिप्लोमा

आनलाइन कोर्स प्रारम्भ है। उसका विस्तार देते हुए यह पाठ्यक्रम संचालित किया जाना प्रस्तावित

है।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने आज के व्याख्यान

को लेकर कहा कि यह व्याख्यान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक विचार यज्ञ

है, जो युवाओं व प्रतिभागियों के वर्तमान व भविष्य की दिशा तय करने में सक्षम होगा।

उन्होंने कहा कि भारत इस समय ऐतिहासिक अमृतकाल के दौर से गुजर रहा है। भारतीय ज्ञान

परंपरा में संतों व महापुरूषों का महान योगदान रहा है। गुजविप्रौवि भी गुरू जम्भेश्वर

जी के आदर्शों व सिद्धांतों से प्रेरित होकर आगे बढ़ रही है।

इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज

द्वारा इंटीग्रेटेड बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स का ब्रोशर जारी किया गया तथा गुजविप्रौवि

की शोध पत्रिका समराथल धारा के नए अंक का विमोचन किया गया। गुरु जम्भेश्वर जी महाराज

धार्मिक अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. किशना राम बिश्नोई ने धन्यवाद किया जबकि मंच

संचालन डा. गीतू धवन ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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